UPI में MDR से इंडस्ट्री को मिल सकता है 20,000 करोड़ तक का फायदा
नई दिल्ली। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने का ऐलान किया है। इस शुल्क का भुगतान ग्राहक को नहीं, बल्कि मर्चेंट को करना होगा। हालांकि, प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपए तय की गई है।
इस बदलाव को लेकर ब्रोकरेज कंपनियों ने UPI इकोसिस्टम में संभावित कमाई का आकलन किया है। उनके अनुमान में काफी अंतर है, लेकिन सभी रिपोर्टों में यह संकेत मिलता है कि MDR से बैंकों, पेमेंट कंपनियों और अन्य डिजिटल पेमेंट खिलाड़ियों के लिए एक नया रेवेन्यू स्रोत तैयार हो सकता है।
यूबीएस के अनुमान के अनुसार, बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए सालाना रेवेन्यू पूल करीब 10,000 से 15,000 करोड़ रुपए हो सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, इस रकम का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा बैंकों के पास जा सकता है, जबकि शेष हिस्सा पेमेंट कंपनियों को मिलने का अनुमान है।
मॉर्गन स्टेनली ने इस व्यवस्था के संभावित असर को खासतौर पर फिनटेक कंपनियों के नजरिए से देखा है। उसके आकलन के मुताबिक, MDR से डिजिटल पेमेंट से जुड़े फिनटेक कारोबारों की कमाई में बदलाव देखने को मिल सकता है।
वहीं, गोल्डमैन सैश ने UPI इंडस्ट्री के संभावित रेवेन्यू पूल का अनुमान 20,600 करोड़ रुपए तक लगाया है। यह आकलन इस धारणा पर आधारित है कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब आधा हिस्सा 40 बेसिस पॉइंट यानी 0.4 प्रतिशत MDR के दायरे में आ सकता है।
जेपी मॉर्गन के अनुसार, संभावित अधिकतम रेवेन्यू पूल करीब 17,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इसमें इश्यूइंग और एक्वायरिंग बैंकों के लिए लगभग 11,700 करोड़ रुपए का हिस्सा शामिल हो सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, यह रकम वित्त वर्ष 2026 में सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंकों के कुल शुद्ध मुनाफे के लगभग 2.1 प्रतिशत के बराबर है।
सिटी ने भी UPI MDR से सालाना करीब 16,000 से 17,000 करोड़ रुपए का इंडस्ट्री रेवेन्यू पूल बनने का अनुमान जताया है। उसके आकलन के मुताबिक, इसमें करीब 60 प्रतिशत हिस्सा बैंकों को, 25 प्रतिशत UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को और 15 प्रतिशत नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिल सकता है।
MDR को लेकर ब्रोकरेज अनुमानों में अंतर मुख्य रूप से UPI लेनदेन के उस हिस्से पर निर्भर करता है, जो शुल्क के दायरे में आएगा। इसके अलावा बैंकों, ऐप प्रोवाइडर्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स के बीच संभावित राजस्व बंटवारे का तरीका भी कुल कमाई के अनुमान को प्रभावित करता है।
UPI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए MDR व्यवस्था का असर डिजिटल पेमेंट से जुड़े पूरे इकोसिस्टम पर पड़ सकता है। जहां बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए यह अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकता है, वहीं मर्चेंट के लिए लेनदेन की लागत बढ़ने का पहलू भी महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल, ब्रोकरेज फर्मों के अलग-अलग अनुमानों के बीच संभावित रेवेन्यू पूल 10,000 करोड़ से 20,600 करोड़ रुपए के दायरे में दिखाई देता है। वास्तविक कमाई कितनी होगी, यह MDR के दायरे में आने वाले लेनदेन की मात्रा और इंडस्ट्री में राजस्व के बंटवारे पर निर्भर करेगी।