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SEBI बदल सकता है CAS का तरीका, डेरिवेटिव्स पर जल्द पेपर

SEBI बदल सकता है CAS का तरीका, डेरिवेटिव्स पर जल्द पेपर

मुंबई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लेकर जल्द नया कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था में सुधार का प्रस्ताव हो सकता है। इस प्रस्ताव पर 24 सितंबर को होने वाली सेबी बोर्ड की बैठक में चर्चा होने की संभावना जताई गई है।

माना जा रहा है कि यह कदम बाजार प्रतिभागियों की उन चिंताओं को दूर करने के लिए उठाया जा सकता है, जो नए CAS सिस्टम के तहत खासकर डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी वाले दिन सेटलमेंट प्राइस तय होने को लेकर सामने आई हैं।

CAS हटाने के बजाय प्रक्रिया सुधारने की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी की योजना क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को खत्म करने की नहीं है। नियामक इसके बजाय एक्सपायरी वाले दिनों में ऑक्शन के जरिए सेटलमेंट प्राइस तय करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार कर रहा है।

SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे पहले ही संकेत दे चुके हैं कि CAS फ्रेमवर्क बाजार में बना रहेगा। उन्होंने कहा था कि नियामक बाजार प्रतिभागियों की ओर से उठाई गई चिंताओं की जांच कर उन्हें दूर करने की कोशिश कर रहा है।

3 अगस्त से लागू है नया सिस्टम

नया CAS फ्रेमवर्क 3 अगस्त से लागू हुआ है। इसके तहत F&O के लिए पात्र शेयरों में सामान्य ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे खत्म हो जाती है। इसके बाद इन सिक्योरिटीज को करीब 20 मिनट के ऑक्शन में भेजा जाता है। इसी दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर के आधार पर आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है।

वहीं, गैर-F&O शेयरों में ट्रेडिंग शाम 3:30 बजे तक चलती है। स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए ट्रेडिंग का समय शाम 3:40 बजे तक रहता है।

एक्सपायरी डे पर बढ़ी अस्थिरता

CAS लागू होने के बाद खासकर डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी वाले दिनों में बाजार के उतार-चढ़ाव को लेकर चर्चा तेज हुई है। पिछले सप्ताह एक कारोबारी सत्र में सेंसेक्स का इंडिकेटिव क्लोज कुछ समय के लिए करीब 2.5 फीसदी नीचे चला गया। इसके बाद क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान सेंसेक्स के पुट ऑप्शंस के प्रीमियम में 400-500 फीसदी तक उछाल देखने को मिला।

इसी तरह मंगलवार को भी एक्सपायरी वाले दिन निफ्टी के पुट ऑप्शंस में कई गुना तेजी दर्ज की गई। इन घटनाओं ने CAS के तहत क्लोजिंग प्राइस तय होने की प्रक्रिया पर बाजार प्रतिभागियों का ध्यान खींचा है।

विश्लेषकों के मुताबिक, CAS ने एक्सपायरी वाले दिन व्यवस्थित ऑप्शंस स्ट्रैटेजी के लिए ट्रेडिंग को पहले की तुलना में कम अनुमानित बना दिया है। उनका कहना है कि ऑक्शन में भागीदारी सीमित रहने पर कुछ बड़े या प्रभावशाली ऑर्डर क्लोजिंग प्राइस में अपेक्षाकृत बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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