BRICS का बढ़ता दम, वैश्विक निर्यात में हिस्सेदारी 24% पहुंची
नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों का प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि 2003 में ब्रिक्स देशों का कुल वैश्विक निर्यात करीब 900 अरब डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही विश्व के कुल निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है।
नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि समूह की बढ़ती प्रासंगिकता केवल राजनीतिक या कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापारिक प्रदर्शन में भी साफ दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सहयोग रोजगार, समृद्धि और आर्थिक अवसरों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों से अपने भुगतान तंत्र को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और डिजिटल कारोबार को ज्यादा सुलभ बनाने की जरूरत बताई। गोयल के अनुसार, इससे सीमा-पार लेनदेन तेज होने के साथ उनकी लागत भी कम की जा सकती है।
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देश ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब अपने अनुभव को ब्रिक्स देशों के साथ साझा करने का समय है। उन्होंने बताया कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई अब 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है और यह दुनिया के प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्मों में अपनी जगह बना चुका है।
गोयल ने कहा कि यूपीआई के जरिए हर साल 250 अरब से अधिक लेनदेन हो रहे हैं। मात्रा के आधार पर यह दुनिया के कुल डिजिटल भुगतान लेनदेन के आधे से ज्यादा हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल नवाचार क्षमता और वित्तीय समावेशन की बड़ी उपलब्धि बताया।
ब्रिक्स की आर्थिक ताकत का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि यह समूह अब वैश्विक व्यापार के करीब एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत भी अंतर-ब्रिक्स व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स देश के विनिर्मित निर्यात के प्रमुख हिस्सों में शामिल हैं, जबकि भारतीय दवा उद्योग को दुनिया में ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ के रूप में पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स सहयोग को संतुलित व्यापार और सेवा क्षेत्र में नए अवसरों की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत चाहता है कि इस सहयोग का लाभ केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि किसान, महिला उद्यमी, युवा और एमएसएमई भी इससे लाभान्वित हों।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में गैर-शुल्क बाधाओं, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं, कृषि एवं कृषि तकनीक, सेवा व्यापार, महिला नेतृत्व वाले कारोबार और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। वहीं, ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 44 से ज्यादा सिफारिशें दी हैं। ब्रिक्स वूमेन्स बिजनेस अलायंस ने भी महिला उद्यमिता को मजबूत करने के लिए रोडमैप तैयार किया है।
कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बात रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में आर्थिक लचीलापन हर देश की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सतत विकास के लिए मजबूत साझेदारी और गहरे सहयोग की आवश्यकता है।
जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स में शामिल देशों के संसाधन, बाजार, क्षमताएं और अनुभव अलग-अलग होने के बावजूद एक-दूसरे के पूरक हैं। यह मंच सदस्य देशों को अलग-अलग विकास मॉडलों से सीखने, सहयोग के नए तरीके विकसित करने और वैकल्पिक रास्ते तलाशने का अवसर देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे कर रहा है, इसलिए यह साल समूह के लिए विशेष महत्व रखता है। भारत की अध्यक्षता में सहयोग को ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ की थीम के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले किया गया है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती संरक्षणवादी व्यापार नीतियों जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे माहौल में भारत ब्रिक्स के जरिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, डिजिटल भुगतान सहयोग और अधिक समावेशी वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।