खाद्य महंगाई बढ़ी, CPI में उछाल से बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। अगस्त में खुदरा महंगाई के आंकड़ों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई जुलाई के 4.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.82 प्रतिशत हो गई। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आया उछाल है।
केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के मुताबिक, अगस्त में कोर महंगाई भी बढ़ी और यह जुलाई के 4.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई। हालांकि, कीमती धातुओं को हटाकर देखें तो कोर महंगाई 3.3 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत नियंत्रित रही।
खाद्य महंगाई जुलाई के 5.52 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5.66 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका स्तर और ज्यादा रहा, जहां खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत दर्ज की गई। कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं ने महंगाई के आंकड़ों पर खासा असर डाला।
अगस्त में अदरक की कीमत में 73.82 प्रतिशत, प्याज में 48.27 प्रतिशत और लहसुन में 43.60 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, टमाटर और आलू ने कुछ राहत दी। टमाटर की कीमत 31.09 प्रतिशत और आलू की कीमत 13.14 प्रतिशत कम हुई।
रजनी सिन्हा के अनुसार, देर से आए मानसून ने प्याज की नई फसल की बुवाई को प्रभावित किया। इसके चलते नई फसल की बाजार में आवक में देरी हुई और कीमतों पर दबाव बना रहा। चीनी के मामले में भी कम गन्ना उत्पादन और एथेनॉल की ओर बढ़ते रुझान ने घरेलू उपलब्धता को प्रभावित किया।
महंगाई का असर केवल घरेलू बजट तक सीमित नहीं है। पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा के मुताबिक, जरूरी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, रेस्तरां और इससे जुड़े कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
इस बीच व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा तथा विविध वस्तु एवं सेवा श्रेणी में महंगाई 15.21 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर रही। इसमें कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी की बड़ी भूमिका रही। अगस्त में चांदी के आभूषण 107.11 प्रतिशत और सोना, हीरा एवं प्लैटिनम के आभूषण 35.53 प्रतिशत महंगे हुए।
पीएचडीसीसीआई के महासचिव एवं सीईओ रणजीत मेहता ने भी महंगी कीमती धातुओं को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सोने-चांदी की लगातार ऊंची कीमतें आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन में मांग को प्रभावित कर सकती हैं।
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। पूरे वित्त वर्ष में औसत महंगाई करीब 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों के साथ मौसम और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी नजर रहेगी।
अब सबसे ज्यादा ध्यान अक्टूबर में होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा पर है। रजनी सिन्हा के मुताबिक, केंद्रीय बैंक आगे भी महंगाई और आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को देखकर फैसला करेगा। अगर महंगाई में लगातार तेजी बनी रहती है, तो आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हो सकती है।