जमुई कांड पर प्रियंका का हमला, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
वायनाड। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित छेड़छाड़ और उत्पीड़न की घटना को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। वायनाड में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो बड़ी-बड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों की बात करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों और केंद्र को इस पर विचार करना चाहिए कि महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस कराने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। यह बयान उन्होंने जमुई की घटना से जुड़े सवाल के जवाब में दिया।
जमुई में यह मामला 19 सितंबर की शाम सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक, दो नाबालिग छात्र—एक लड़की और एक लड़का—कोचिंग से लौट रहे थे, तभी मड़वा पहाड़ इलाके के पास लोगों के एक समूह ने उन्हें रोक लिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान के लिए फुटेज का इस्तेमाल किया।
मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में यादव के पैर में गोली लगी और उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, उसकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या पांच हो गई है।
इससे पहले पुलिस ने घटना में शामिल अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की थी। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है और वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। शुरुआती कार्रवाई में तीन लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद पुलिस ने इसे लेकर अलग कार्रवाई भी शुरू की। बिहार पुलिस ने करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि वीडियो के प्रसार से नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा था। लोगों से वीडियो को आगे साझा या प्रसारित नहीं करने की अपील भी की गई है।
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर व्यापक चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर सुरक्षा का माहौल तैयार करना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
जमुई की घटना के बाद अब पुलिस जांच के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मामले में आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की प्रगति पर नजर बनी हुई है।