पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित, सुख और मंगल का दिया संदेश
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा कर सुख, शांति और मंगल की कामना का संदेश दिया। उन्होंने ऋग्वेद के 10वें मंडल के 63वें सूक्त के 10वें मंत्र को साझा किया, जिसमें जीवन की यात्रा को सुरक्षित और कल्याणकारी बनाने के लिए दिव्य शक्तियों से प्रार्थना की गई है।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया मंत्र है—
“सुत्रामाणं पृथिवीं द्यामनेहसं सुशर्माणमदितिं सुप्रणीतिम्।
दैवीं नावं स्वरित्रामनागसो अस्रवन्तीमा रुहेमा स्वस्तये॥”
इसका भावार्थ स्थिर और उत्तम संरक्षण प्रदान करने वाली पृथ्वी तथा कल्याणकारी और निर्बाध आकाशरूपी आधार का आश्रय लेने से जुड़ा है। मंत्र में पापरहित रहते हुए शुभ मार्ग पर आगे बढ़ने और ऐसी कल्याणकारी शक्ति का आश्रय लेने की कामना की गई है, जो मनुष्य को सुख और मंगल की ओर ले जाए।
जीवन को समुद्र यात्रा से जोड़ा गया
इस वैदिक मंत्र में मानव जीवन को एक समुद्री यात्रा के रूपक के माध्यम से समझाया गया है। संसार को अथाह सागर के समान माना गया है, जहां सुख-दुख, उतार-चढ़ाव और अनेक तरह की कठिनाइयां आती रहती हैं। ऐसे में सुरक्षित और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए दिव्य नौका का प्रतीक प्रस्तुत किया गया है।
मंत्र की व्याख्या में ऐसी नौका की कल्पना की गई है, जो सुरक्षित हो, अविनाशी हो और अच्छी पतवारों से युक्त हो। इसका उद्देश्य जीवन रूपी सागर को बिना बाधा पार करने और मनुष्य को कल्याण की दिशा में ले जाने से जुड़ा है।
सत्य, धर्म और सदाचार को पतवार का प्रतीक
मंत्र के भाव में जीवन की दिशा तय करने के लिए सत्य, धर्म और सदाचार को अच्छे चप्पुओं या पतवारों के प्रतीक के रूप में देखा गया है। ऐसी नौका मनुष्य को संकटों से बचाते हुए सही मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायक मानी गई है।
इसमें यह संदेश भी निहित है कि मनुष्य को स्वयं पापरहित और पवित्र आचरण वाला बनने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान, भक्ति और सत्कर्म को जीवन की यात्रा के लिए सहायक साधनों के रूप में देखा गया है।
अथर्ववेद और शुक्ल यजुर्वेद में भी मिलता है मंत्र
यह मंत्र केवल ऋग्वेद तक सीमित नहीं है। यह अथर्ववेद और शुक्ल यजुर्वेद में भी मिलता है। शुक्ल यजुर्वेद के अध्याय 21 में भी इसका उल्लेख है। इस मंत्र का संबंध ‘स्वस्ति-वाचन’ यानी कल्याण और मंगल की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।
मंत्र के जरिए ऋषि देवताओं से ऐसी शक्ति और संरक्षण की प्रार्थना करते हैं, जो जीवन की कठिनाइयों के बीच मनुष्य को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने में सहायता करे। व्यापक अर्थ में यह प्रार्थना जीवन में शांति, सद्बुद्धि, अच्छे कर्म और परम कल्याण की कामना को सामने रखती है।
पीएम मोदी द्वारा इस वैदिक मंत्र को साझा किए जाने के बाद इसका भाव एक बार फिर चर्चा में आया है। सुभाषित का केंद्रीय संदेश यही है कि मनुष्य शुभ मार्ग पर चले, अपने आचरण को पवित्र बनाए और जीवन की चुनौतियों के बीच सत्य तथा सदाचार का सहारा लेकर कल्याण की ओर आगे बढ़े।