हामिद अंसारी के बयान पर सुधांशु का हमला, कांग्रेस को बताया ‘मुस्लिम लीग-माओवादी’
नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के जवाहरलाल नेहरू से जुड़े बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी की विचारधारा अब ‘अल्ट्रा लेफ्ट’ की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इसी क्रम में कांग्रेस के लिए ‘मुस्लिम लीग-माओवादी कांग्रेस’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
दरअसल, हामिद अंसारी ने 18 सितंबर को एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में ए.जी. नूरानी की 2019 में प्रकाशित किताब ‘The RSS: A Menace to India’ का जिक्र किया था। उन्होंने किताब के परिचय में दर्ज एक टिप्पणी का हवाला दिया, जिसे पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक के संदर्भ में दर्ज किए जाने की बात कही गई। अंसारी के मुताबिक, उस टिप्पणी में नेहरू ने भारत के लिए साम्यवाद के बजाय हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को बड़ा खतरा बताया था।
‘कांग्रेस अब मुस्लिम लीग-माओवादी कांग्रेस’
इसी बयान को लेकर सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हामिद अंसारी ने जिस ऐतिहासिक टिप्पणी का हवाला दिया, उससे कांग्रेस की मौजूदा वैचारिक दिशा पर सवाल खड़े होते हैं। त्रिवेदी ने दावा किया कि कांग्रेस अब ‘मुस्लिम लीग-माओवादी कांग्रेस’ बन गई है।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि यदि नेहरू के हवाले से साम्यवाद को खतरे के रूप में देखा गया था, तो आज की कांग्रेस को लेकर यह सवाल उठता है कि वह किस दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने राहुल गांधी को भी अपने निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि उनकी राजनीति में वामपंथी विचारों का प्रभाव बढ़ रहा है। ये त्रिवेदी के राजनीतिक आरोप हैं।
‘नेहरू का जिक्र हमने नहीं किया’
सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान में यह भी कहा कि भाजपा की ओर से नेहरू को चर्चा में नहीं लाया गया, बल्कि हामिद अंसारी ने खुद अपने भाषण में उनका उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंसारी देश के उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके हैं और उनके द्वारा नेहरू के पुराने कथन का उल्लेख किए जाने को राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज जिन विचारों और मुद्दों के साथ आगे बढ़ रही है, उनका संबंध पार्टी के पुराने वैचारिक रुख से जोड़ा जा सकता है। भाजपा नेता ने इसी आधार पर राहुल गांधी और कांग्रेस की वर्तमान राजनीति पर सवाल खड़े किए।
केरल में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन का मुद्दा
त्रिवेदी ने केरल में कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के राजनीतिक गठबंधन को भी अपने हमले का आधार बनाया। उन्होंने मुस्लिम लीग के इतिहास का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस का IUML के साथ राजनीतिक संबंध उसकी विचारधारा को लेकर क्या संकेत देता है।
उन्होंने IUML के संस्थापक मोहम्मद इस्माइल और अविभाजित मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक संबंधों का हवाला दिया। त्रिवेदी ने दावा किया कि यदि कोई IUML और जिन्ना की मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक संबंधों को पूरी तरह नकारता है, तो कांग्रेस के पुराने और मौजूदा राजनीतिक स्वरूप की तुलना भी इसी तरह की जानी चाहिए।
हामिद अंसारी ने क्या कहा था?
विवाद की मूल वजह हामिद अंसारी का एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में दिया गया भाषण है। उन्होंने नूरानी की किताब ‘The RSS: A Menace to India’ का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें नेहरू की एक टिप्पणी दर्ज है। अंसारी के अनुसार, यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक से जुड़ी थी और इसे तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया ने दर्ज किया था।
अंसारी ने अपने भाषण में नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसी प्रवृत्तियां सामने आई हैं जो उनके अनुसार नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित अवधारणा को चुनौती देती हैं।
बयान के बाद बढ़ा सियासी विवाद
हामिद अंसारी के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और उसकी विचारधारा को लेकर सवाल उठाए हैं। सुधांशु त्रिवेदी का बयान इसी राजनीतिक प्रतिक्रिया की कड़ी है। भाजपा की ओर से अंसारी की टिप्पणी पर अन्य नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है, जबकि मूल विवाद नेहरू के पुराने कथन, हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता और कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक दिशा को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है।