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25 सितंबर को जयपुर को मिलेगा नया महापौर, कोठारी के सामने बड़ी चुनौती

25 सितंबर को जयपुर को मिलेगा नया महापौर, कोठारी के सामने बड़ी चुनौती

 

  • जयपुर महापौर चुनाव 25 सितंबर को होगा।
  • सुनील कोठारी भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी हैं।
  • सफाई और अतिक्रमण नई शहरी सरकार के सामने बड़ा मुद्दा रहेगा।

 

जयपुर। जयपुर नगर निगम को 25 सितंबर को नया महापौर मिलने जा रहा है। भाजपा ने वार्ड 112 से पार्षद सुनील कोठारी को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से सुनीता मावर मैदान में हैं। नामांकन की जांच के बाद अन्य उम्मीदवारों के नाम भी सामने आए हैं, इसलिए अंतिम तस्वीर मतदान के बाद ही साफ होगी।

150 सदस्यीय जयपुर नगर निगम में भाजपा के पास 78 पार्षद हैं। कांग्रेस के 57 और निर्दलीय पार्षदों की संख्या 15 है। इस संख्याबल के बीच महापौर चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हालांकि किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में अंतिम फैसला 25 सितंबर को पार्षदों के मतदान के बाद ही होगा।

चुनावी हलचल से अलग अब सबसे बड़ा सवाल जयपुर की शहरी व्यवस्था को लेकर है। ‘पिंक सिटी’ की पहचान ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन के साथ जुड़ी है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में सफाई, अतिक्रमण, यातायात, पार्किंग, सड़क और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याएं लगातार चर्चा में रहती हैं। नए महापौर के लिए इन मुद्दों पर ठोस व्यवस्था बनाना अहम चुनौती होगी।

अतिक्रमण पर स्थायी समाधान की उम्मीद

जयपुर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त सड़कों पर अतिक्रमण लंबे समय से नागरिकों के लिए परेशानी का कारण रहा है। फुटपाथों पर अस्थायी कब्जे, सड़क किनारे गतिविधियां और बेतरतीब पार्किंग से कई इलाकों में आवागमन प्रभावित होता है। नगर निगम समय-समय पर अभियान चलाता रहा है, लेकिन कार्रवाई के बाद दोबारा अतिक्रमण की समस्या सामने आने का मुद्दा भी उठता रहा है।

ऐसे में नई शहरी सरकार के सामने चुनौती केवल अतिक्रमण हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की होगी जिससे कार्रवाई लगातार और समान नियमों के तहत हो। बाजारों और प्रमुख सड़कों की नियमित निगरानी के साथ फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों के बेहतर इस्तेमाल की योजना भी जरूरी होगी।

सफाई व्यवस्था को अभियान नहीं, नियमित व्यवस्था बनाने की जरूरत

जयपुर में सफाई व्यवस्था भी महापौर के एजेंडे में प्रमुख मुद्दा रह सकती है। शहर को केवल स्वच्छता अभियान या सर्वेक्षण के दौरान बेहतर दिखाने के बजाय रोजाना सफाई, समय पर कचरा उठाव और वार्ड स्तर पर निगरानी की जरूरत होगी।

मुख्य बाजारों के अलावा कॉलोनियों, बाहरी क्षेत्रों, पुराने शहर के मोहल्लों और कच्ची बस्तियों में भी सफाई व्यवस्था पर बराबर ध्यान देना होगा। कचरा जमा होने वाले स्थानों की पहचान, नियमित उठाव और खुले में कचरा डालने की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई से व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है।

सड़क, नाली और पार्किंग भी बड़ी चुनौती

महापौर के सामने शहर की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी कई अपेक्षाएं रहेंगी। टूटी सड़कें, खुले या जाम नाले, खराब स्ट्रीट लाइट और अव्यवस्थित पार्किंग जैसे मुद्दे सीधे आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं।

जयपुर में बढ़ते यातायात दबाव के बीच पार्किंग की समस्या का स्थायी समाधान भी आसान नहीं होगा। बाजार क्षेत्रों में पार्किंग प्रबंधन, फुटपाथों को खाली रखना और यातायात एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय नगर निगम की कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा बन सकता है।

सिर्फ महापौर नहीं, पार्षदों की भूमिका भी अहम

नगर निगम की व्यवस्था केवल महापौर के भरोसे नहीं चलती। 150 वार्डों के पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को निगम तक पहुंचाने और विकास कार्यों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में नए बोर्ड के सामने वार्ड स्तर पर समस्याओं की नियमित समीक्षा, सड़क और नाली निर्माण की गुणवत्ता, सफाई, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं पर निगरानी मजबूत करने की चुनौती होगी। विकास कार्यों में पारदर्शिता और समय पर काम पूरा होना भी नागरिकों की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल रहेगा।

अधिकारियों के साथ तालमेल भी जरूरी

महापौर के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होगा। कई बार स्थानीय विकास कार्यों में प्रक्रिया, स्वीकृति और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी को लेकर सवाल उठते हैं।

ऐसे में वार्डवार समस्याओं की सूची तैयार कर उनकी समयसीमा तय करना, नियमित समीक्षा बैठकें करना और लंबित कामों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं काम को गति दे सकती हैं। इससे जनता से जुड़े छोटे कामों के लिए अनावश्यक देरी कम करने में मदद मिल सकती है।

एकीकृत जयपुर का मुद्दा भी रहेगा अहम

सुनील कोठारी का नाम जयपुर नगर निगम को फिर से एक करने की मांग से भी जुड़ा रहा है। पूर्ववर्ती व्यवस्था में जयपुर नगर निगम को हेरिटेज और ग्रेटर, दो निगमों में बांटा गया था। बाद में दोनों निगमों को एक करने की मांग उठती रही। कोठारी ने भी इस मुद्दे को लेकर अभियान चलाया था।

अब महापौर पद के लिए प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उनके सामने शहर से जुड़े इस मुद्दे के साथ-साथ शहरी सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने की चुनौती होगी। यदि निगम व्यवस्था को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास होते हैं तो सफाई, कचरा प्रबंधन, ट्रैफिक, पार्किंग और बाजार व्यवस्था जैसे विषयों पर भी समन्वित योजना की जरूरत पड़ेगी।

जनता को घोषणाओं से ज्यादा जमीन पर काम चाहिए

जयपुर के नागरिकों के लिए नए महापौर का कार्यकाल इस बात से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा कि रोजमर्रा की समस्याओं में कितना बदलाव आता है। जिस सड़क की शिकायत हो रही है, उसका समाधान हुआ या नहीं; जिस बाजार में अतिक्रमण है, वहां व्यवस्था सुधरी या नहीं; जिस इलाके में नियमित कचरा जमा होता है, वहां सफाई व्यवस्था बेहतर हुई या नहीं—इन सवालों का जवाब जमीन पर दिखाई देना जरूरी होगा।

25 सितंबर के चुनाव के बाद नई शहरी सरकार के सामने इसलिए सिर्फ राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि शहर की मूलभूत व्यवस्थाओं को सुधारने की प्रशासनिक चुनौती भी होगी। जयपुर की पहचान को मजबूत करने के लिए स्वच्छता, व्यवस्थित बाजार, बेहतर यातायात, पार्किंग, साफ नालियां और अतिक्रमण मुक्त सार्वजनिक स्थान जैसे मुद्दों पर लगातार काम करना होगा।

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