राज ठाकरे का बड़ा वार, EVM हटाने की मांग
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के इस्तेमाल को खत्म करने की अपील की। उन्होंने आने वाले चुनावों में पारंपरिक पेपर बैलेट से मतदान कराने की मांग उठाई। ठाकरे ने यह रुख चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामने रखा।
ठाकरे ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता सूची के प्रबंधन, फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा तक पहुंच और सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।
मनसे प्रमुख ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े 16.10 लाख अपीलों और गोवा में 97 मतदाताओं के मामले का भी जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों ने 97 लोगों को पात्र पाया था, लेकिन सॉफ्टवेयर में उनकी स्थिति दर्ज करने की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सका।
ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उन्होंने आयोग के दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होने की अपील भी की।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के साथ-साथ आयोग के फैसलों को प्रभावित करने वाले कथित लोगों की स्वतंत्र जांच की मांग रखी। इसके अलावा ठाकरे ने मौजूदा सरकार के इस्तीफे की मांग भी की और कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है।
ठाकरे ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि अगर चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर ही असहमति सामने आ रही है, तो उसकी संवैधानिक स्वायत्तता को लेकर भरोसा कैसे कायम रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था के तौर पर काम करने का भरोसा नहीं मिलता, तब तक चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवाल खत्म नहीं होंगे।
हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन आरोपों से अलग तस्वीर पेश की है। आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच राज ठाकरे ने पेपर बैलेट की वापसी को लेकर अपनी मांग दोहराई है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोगों का भरोसा बनाए रखना सबसे अहम मुद्दा है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से सामने आया पक्ष रिपोर्ट में लगाए गए संस्थागत मतभेदों के दावों से अलग है।