पीएम मोदी ने शेयर किया नया सुभाषित, विद्या को बताया खास शक्ति
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक और संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस बार उन्होंने ‘हरिहर सुभाषितम्’ के बालविनय प्रकरण में शामिल श्लोक को पोस्ट किया। इस श्लोक में विद्या के महत्व को बताते हुए उसे इंसान के जीवन को बेहतर दिशा देने वाली शक्ति के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा—
“उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्।
उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥”
यह ‘हरिहर सुभाषितम्’ के बालविनय प्रकरण का सातवां श्लोक बताया गया है। इसके भावार्थ में कहा गया है कि विद्या व्यक्ति को सामाजिक व्यवहार की समझ देती है, ज्ञान और समृद्धि की राह खोलती है, मन को प्रसन्न रखती है और उसके महत्व को बढ़ाती है।
श्लोक में विद्या की तुलना सुशासन की सेवा से की गई है। इसका संदेश है कि जिस तरह अच्छी शासन व्यवस्था और उसकी सेवा मन को संतोष देती है, उसी तरह विद्या भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर उसे ऊंचाई की ओर ले जाती है।
‘हरिहर सुभाषितम्’ संस्कृत साहित्य में महत्वपूर्ण सुभाषित-संग्रह माना जाता है। इसमें जीवन, नैतिकता, आचरण और मानवीय मूल्यों से जुड़े कई प्रेरक वचन मिलते हैं। 'सुभाषित' का अर्थ ही ऐसे सुंदर और सार्थक वचनों से है, जो व्यक्ति को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
पीएम मोदी इससे पहले भी लगातार संस्कृत के श्लोक और वैदिक मंत्र सोशल मीडिया पर साझा करते रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने यह श्लोक पोस्ट किया था—
“अणुभ्यश्च महद्भ्यश्च शास्त्रेभ्यः कुशलो नरः।
सर्वतः सारमादद्यात् पुष्पेभ्य इव षट्पदः॥”
इसका भाव यह है कि समझदार व्यक्ति छोटे-बड़े सभी शास्त्रों से उपयोगी ज्ञान ग्रहण करता है, ठीक उसी तरह जैसे भौंरा अलग-अलग फूलों से केवल मधुरस ग्रहण करता है।
इससे एक दिन पहले सोमवार को प्रधानमंत्री ने एक वैदिक मंत्र भी साझा किया था—
“शं नो वातः पवतां शं नस्तपतु सूर्यः।
शं नः कनिक्रदद् देवः पर्जन्योऽभिवर्षतु॥”
इस मंत्र में वायु, सूर्य और वर्षा के सभी के लिए कल्याणकारी होने की कामना की गई है।
प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत के ऐसे संदेशों को डिजिटल मंच पर साझा करने से प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को नए दौर के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास दिखाई देता है। ऐसे सुभाषितों में शिक्षा, अच्छे आचरण, सकारात्मक सोच और जीवन-मूल्यों से जुड़े संदेश होते हैं, जिन्हें आज के संदर्भ में भी उपयोगी माना जा सकता है।