वंदे मातरम पर बढ़ी सियासी बयानबाजी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के पूरे गायन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं। कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने बुधवार को उम्मीद जताई कि उनके सहयोगी दलों समेत अन्य राजनीतिक पार्टियां निर्धारित दो छंदों के गायन की परंपरा का पालन करेंगी। दूसरी ओर, भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के पूरे गायन के दौरान सम्मान में खड़े रहने को सकारात्मक पहल बताया।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने दोनों नेताओं की सराहना करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उमर और फारूक अब्दुल्ला ने 'वंदे मातरम' का सम्मान किया। उन्होंने दावा किया कि दोनों नेता सभी छह छंदों के दौरान खड़े रहे और केंद्र सरकार के नए फैसले का भी सम्मान किया।
प्रतुल शाह देव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को इससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश किसी राजनीतिक दल के कहने से नहीं बल्कि कानून और संविधान के अनुसार चलता है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीपी की ओर से भी केवल दो छंद गाने की व्यवस्था से असहमति जताई जा रही है, जबकि कांग्रेस के महासचिव दो से अधिक छंद नहीं गाने के अपने रुख पर कायम हैं।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी का रुख पहले ही महासचिव (संगठन) की ओर से स्पष्ट किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में 'वंदे मातरम' के वही दो छंद गाए जाते हैं, जिन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तय परंपरा के मुताबिक अपनाया गया था। खेड़ा ने उम्मीद जताई कि सहयोगी दलों समेत अन्य राजनीतिक दल भी इसी व्यवस्था का पालन करेंगे।
खेड़ा के मुताबिक, ये दो छंद देश को एकजुट करने की भावना से जुड़े हैं। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर उसकी निर्धारित परंपरा का पालन किया जाना चाहिए।
सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी. संतोष ने इस मुद्दे पर अलग रुख रखते हुए कहा कि हर राजनीतिक दल को अपना दृष्टिकोण तय करने का अधिकार है। उन्होंने उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला को अनुभवी राजनेता बताते हुए कहा कि वे अपने राजनीतिक रुख के लिए स्वतंत्र हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआई का नजरिया अलग हो सकता है और विभिन्न दलों की राय भी अलग-अलग हो सकती है।
हालांकि, संतोष ने 'वंदे मातरम' को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिशों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल देने के बजाय देश के सामने मौजूद दूसरे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी लंबे समय से देश की विचारधारा और विरासत को नुकसान पहुंचाती रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। जायसवाल ने दावा किया कि 'वंदे मातरम' के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख देश के सामने है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय गीत के गायन, उसके छंदों और राजनीतिक दलों की अलग-अलग व्याख्याओं को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां कांग्रेस निर्धारित दो छंदों की परंपरा पर कायम है, वहीं भाजपा इसे व्यापक रूप से सम्मान देने की बात कर रही है।