पी चिदंबरम बोले- लोकतंत्र में सरकार बदलना सामान्य प्रक्रिया
नई दिल्ली। देश में चुनावी प्रक्रिया और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सरकार बदलने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के जरिए सरकार को सत्ता से हटाना एक सामान्य प्रक्रिया है और विपक्ष की जिम्मेदारी भी यही है।
चिदंबरम ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा की आलोचना करते हुए सवाल किया कि ‘रिजीम चेंज’ यानी शासन परिवर्तन शब्द के इस्तेमाल पर पार्टी इतना नाराज क्यों है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन कोई असामान्य बात नहीं है।
कांग्रेस नेता ने विपक्ष की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार का विरोध करना, उसकी नीतियों और कामकाज को उजागर करना तथा चुनाव के जरिए उसे सत्ता से हटाना विपक्ष का काम है। उनके मुताबिक, राजनीतिक विरोध संसद और सार्वजनिक मंचों पर किया जा सकता है, जबकि सरकार बदलने का फैसला मतदाता चुनाव के दौरान करते हैं।
यह बयान दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस दौरान कुछ विपक्षी नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं की ओर से ‘सरकार बदलने’ की बात भी कही गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन को ‘सरकार बदलने की लड़ाई’ बताते हुए इसे नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार कहा था। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के जेन-जी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा था कि यह भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है। इन बयानों को लेकर भाजपा ने नाराजगी जताई है।
भाजपा ने विपक्ष की टिप्पणियों को केवल चुनावी अनियमितताओं तक सीमित न मानते हुए व्यापक राजनीतिक बदलाव की कोशिश से जोड़ा है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष के कुछ नेता सरकार को हटाने की बात को इस तरह पेश कर रहे हैं, जिससे देश में राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कांग्रेस, विपक्षी गठबंधन और वामपंथी दलों पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि जनता के बीच समर्थन घटने और राजनीतिक सफलता की सीमित संभावनाओं के कारण विपक्ष में ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। त्रिवेदी ने इस शब्दावली को हिंसक संघर्ष, साजिश और विदेशी ताकतों के सहयोग से सरकार गिराने जैसी आशंकाओं से भी जोड़ा।
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भाजपा पर सत्ता को लेकर असुरक्षा महसूस करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी शासन परिवर्तन की मांग को ‘देश-विरोधी’ और ‘अराजक’ बताकर राजनीतिक बहस को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश कर रही है। खेड़ा ने यह भी कहा कि कांग्रेस मौजूदा शासन को बदलने के लिए गंभीर है।
फिलहाल, इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग राजनीतिक दलीलें सामने आ रही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा ‘रिजीम चेंज’ जैसे बयानों को व्यापक राजनीतिक चुनौती के रूप में देख रही है। इस बहस के केंद्र में चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और लोकतंत्र में विपक्ष के अधिकार बने हुए हैं।