G20 बैठक में नहीं बन पाई अंतिम सहमति, पीयूष गोयल ने बताई वजह
नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के मिल्वौकी में हुई G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कुछ विषयों पर मतभेदों के चलते व्यापक आउटकम डॉक्यूमेंट जारी नहीं हो सका। हालांकि, उन्होंने बैठक में हुई बातचीत को उपयोगी बताया और कहा कि कई मुद्दों पर देशों के बीच साझा आधार भी सामने आया।
गोयल ने शुक्रवार को शिकागो में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान मिल्वौकी बैठक के बारे में जानकारी दी। G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को अमेरिका की अध्यक्षता में हुई थी।
जबरन मजदूरी और WTO पर हुई बातचीत
बैठक में वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से बने उत्पादों को लेकर भी चर्चा हुई। गोयल ने कहा कि भारत ऐसे उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करता है, लेकिन व्यापार संबंधी कदम ठोस और सत्यापित साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए। भारत ने पूरे देश, क्षेत्र या सेक्टर को व्यापक आधार पर निशाना बनाने के बजाय प्रमाण-आधारित कार्रवाई पर जोर दिया।
WTO के भविष्य पर भी मंत्रियों ने चर्चा की। गोयल ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए WTO के नियमों के अनुरूप व्यापारिक उपायों की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने विकासशील देशों के लिए नीतिगत गुंजाइश बनाए रखने की बात भी रखी।
बड़ी उत्पादन क्षमता का मुद्दा भी उठा
बैठक में कुछ देशों में सरकारी समर्थन से विकसित बड़ी उत्पादन क्षमता और उसके वैश्विक व्यापार पर प्रभाव का मुद्दा भी चर्चा में रहा। गोयल ने कहा कि ऐसी उत्पादन क्षमता का असर उन देशों के विनिर्माण क्षेत्र पर नहीं पड़ना चाहिए, जहां निष्पक्ष व्यापार और प्रतिस्पर्धा के आधार पर कारोबार किया जाता है।
भारत ने इस चर्चा में यह भी स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों को लेकर संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की बात की जा रही है, उनमें भारत की क्षमता घरेलू मांग और वैश्विक जरूरतों को पूरा करने से जुड़ी है। गोयल ने व्यापक देश-स्तरीय धारणाओं के बजाय विशिष्ट और प्रमाणित तथ्यों के आधार पर व्यापारिक कार्रवाई की वकालत की।
खाद्य व्यापार के मुद्दे पर बनी सहमति
G20 बैठक में खाद्य पदार्थों के व्यापार को दबाव या भू-राजनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ सदस्य देशों ने एक साझा बयान पर सहमति जताई। अमेरिकी अध्यक्षता ने इस मुद्दे को बैठक की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया था।
हालांकि, संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, जबरन मजदूरी और WTO से जुड़े कुछ मुद्दों पर सभी सदस्य देशों के बीच समान राय नहीं बन सकी। इसी व्यापक मतभेद की वजह से पूर्ण आउटकम डॉक्यूमेंट पर सहमति नहीं हो पाई।
शिकागो में निवेशकों से मिले गोयल
मिल्वौकी बैठक के बाद गोयल शिकागो पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिकी कारोबारी संगठनों, निवेशकों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ बातचीत की। उन्होंने भारतीय-अमेरिकी कारोबारियों से भारत में निवेश बढ़ाने और देश के आर्थिक विस्तार में भागीदारी का आह्वान किया।
गोयल ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश के अवसरों पर भी चर्चा की। उनके मुताबिक, वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव के बीच भारत सप्लाई चेन और विनिर्माण क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने पर काम कर रहा है।
G20 की अमेरिकी अध्यक्षता में अहम व्यापार एजेंडा
2026 में G20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है। मिल्वौकी की व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में खाद्य व्यापार, संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, WTO के मोस्ट-फेवर्ड-नेशन सिद्धांत में बदलाव और वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी को प्रमुख विषयों के तौर पर रखा गया था।
गोयल ने कहा कि अंतिम दस्तावेज पर सहमति नहीं बन पाना मतभेदों का संकेत है, लेकिन बैठक के दौरान हुई बातचीत को उन्होंने उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच कई मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है और साझा हित वाले क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बनी हुई हैं।