ममता का चुनाव आयोग पर हमला, बोलीं- चुनाव प्रक्रिया ‘हाईजैक’ हुई
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि देश की चुनावी प्रक्रिया ‘हाईजैक’ होकर केंद्रीकृत हो गई है। ममता ने आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। ये उनके आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को लेकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की बात कही है।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तंज कसते हुए ‘वैनिश कुमार’ कहा। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के मतदान के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की गई है तो इसे लेकर फैसला देश की जनता को करना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा करते हुए कहा कि जिन इलाकों में पहले तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली थी, वहां कथित तौर पर अधिक संख्या में नाम हटाए गए।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को लेकर अदालतों तक गई और कथित रूप से प्रभावित लोगों को लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय भी पहुंची। ममता के मुताबिक, उनकी शिकायतों पर अपेक्षित तरीके से सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से पार्टी के सांसदों की मुलाकात के दौरान उन्हें वहां से जाने के लिए कहा गया।
2023 के प्रतिरक्षा प्रावधान पर भी सवाल
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण पर भी सवाल उठाया। उन्होंने 2023 में लागू किए गए उस प्रावधान का जिक्र किया, जिसके तहत निर्वाचन आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों से जुड़े मामलों में कुछ परिस्थितियों में कानूनी सुरक्षा दी गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रावधान उस समय पारित किया गया जब विपक्ष के 147 सांसद निलंबित थे। ममता ने कहा कि इस तरह के प्रावधान के जरिए कानून को अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मतदाता सूची को लेकर कई दावे
ममता ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के आंकड़ों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2021 से 2026 के बीच करीब 3.5 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। साथ ही उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े पेश करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों में कथित तौर पर ज्यादा नाम हटे हैं।
हालांकि, SIR को लेकर सामने आए आंकड़ों और दावों की अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं। हाल की रिपोर्टों में निर्वाचन आयोग के मतदाता सूची सॉफ्टवेयर की समीक्षा और SIR प्रक्रिया को लेकर आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का भी उल्लेख हुआ है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के आईटी विभाग की महानिदेशक सीमा खन्ना का भी नाम लिया और आरोप लगाया कि उनकी भूमिका मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में रही। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उनकी नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखा था।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनाव अधिकारियों के संगठन की ओर से आयोग को भेजे गए पत्र का भी जिक्र किया। ममता के अनुसार, पत्र में चुनाव अधिकारियों को ईसीआईएनईटी सॉफ्टवेयर तक पहुंच नहीं दिए जाने को लेकर आपत्ति जताई गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि 18 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने आत्महत्या की।
मतगणना और EVM को लेकर भी आरोप
ममता बनर्जी ने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में मतगणना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वह करीब 15 हजार वोटों से आगे चल रही थीं, लेकिन दो-तीन राउंड के बाद मतगणना केंद्र की स्थिति बदल गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके समर्थकों को मतगणना केंद्र में प्रवेश करने से रोका गया तथा CCTV कैमरों को भी बाधित किया गया। ममता ने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
हाल की एक रिपोर्ट में भी ममता के हवाले से मतगणना के दौरान CCTV और EVM को लेकर इसी तरह के आरोप दर्ज किए गए हैं। हालांकि, ये दावे उनके राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
ममता ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की अधिकारी सीमा खन्ना ने पश्चिम बंगाल में मतगणना प्रक्रिया को प्रभावित किया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर केंद्र सरकार को संतुष्ट करने के लिए कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के तहत संचालित किए जाने की बात कहता रहा है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव, आपत्तियों के निपटारे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहेंगे।