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जयपुर: मुख्यमंत्री जी, मुझे जगह, समय और दिन बता दें, मैं जहां भी बुलाएंगे 'डिबेट' में आने को तैयार हूं: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली

जयपुर: मुख्यमंत्री जी, मुझे जगह, समय और दिन बता दें, मैं जहां भी बुलाएंगे 'डिबेट' में आने को तैयार हूं: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली

जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आज एक प्रेस वार्ता में भजनलाल सरकार के 2 साल के कार्यकाल को पूरी तरह विफल करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी 2 साल बाद पहली बार प्रेस वार्ता कर रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि वे मीडिया और जनता के प्रति कितने गंभीर हैं। सरकार का यह दावा कि उन्होंने 'संकल्प पत्र' के 72 प्रतिशत वादे पूरे कर दिए हैं, वास्तव में '72 प्रतिशत पूरा' नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के साथ '72 प्रतिशत का धोखा' है। वहीं, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा हाल ही में दिए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पलटवार किया है और कहा है कि "मुख्यमंत्री जी, मुझे जगह, समय और दिन बता दें, मैं जहां भी बुलाएंगे 'डिबेट' में आने को तैयार हूँ। " नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की पोल खोलते हुए घोषणा पत्र के 10 प्रमुख वादों और राज्य की बदहाल स्थिति पर बिंदुवार तथ्य रखे: प्रमुख बिंदु 1: संकल्प पत्र के 10 प्रमुख वादों की हकीकत (धोखा पत्र) किसान सम्मान निधि: घोषणा पत्र (पेज 9) में राशि ₹12,000 करने का वादा था, बिना किसी 'चरणबद्ध' शर्त के। लेकिन सरकार ने केवल ₹9,000 दिए हैं। यह वादाखिलाफी है। जल जीवन मिशन: 2025 तक हर घर जल का वादा (पेज 15) फेल हो चुका है। दिसंबर 2025 की समय सीमा सिर पर है और 34 लाख घर अभी भी प्यासे हैं। इस साल 20 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 8 महीने में मात्र 1.66 लाख कनेक्शन दिए गए हैं। MSP पर खरीद: मूंग, उड़द और मूंगफली की खरीद के वादे (पेज 20) हवा हो गए। किसान टोकन के लिए तरस रहे हैं और 'फर्जी गिरदावरी' के जरिए व्यापारियों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। गेहूं पर 2700 रु और बाजरे की MSP का वादा भी अधूरा है। स्थानांतरण नीति: पारदर्शी नीति (पेज 12) के बजाय प्रदेश में 'तबादला उद्योग' खुल गया है। 8 लाख कर्मचारी ठगे गए हैं और RSS की लिस्ट व राजनीतिक द्वेष के आधार पर तबादले हो रहे हैं। स्कूल ड्रेस योजना: 1200 रु के वादे के मुकाबले केवल 600 रु दिए जा रहे हैं। इसमें भी जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के गरीब बच्चों को बाहर कर सरकार ने भेदभाव किया है। पशुधन बीमा: योजना वेंटिलेटर पर है। कांग्रेस राज में 80 लाख पशु पंजीकृत थे, अब गिरकर 20 लाख रह गए हैं। 90% से अधिक दावे खारिज किए जा रहे हैं।सरकारी नौकरियां: एक साल में सभी रिक्त पद भरने का वादा था, लेकिन शिक्षा विभाग में ही 1.25 लाख पद खाली पड़े हैं।

शिक्षा संस्थान (RIT/RIMS): हर संभाग में IIT/AIIMS की तर्ज पर संस्थान खोलने का वादा था, लेकिन पुराने संस्थानों के नाम बदलने के अलावा एक भी नया संस्थान नहीं खोला गया।जमीन नीलामी: नीलामी रोकने के लिए कोई कानून नहीं लाया गया। कांग्रेस सरकार के 'कृषि ऋण राहत आयोग' को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पेट्रोल-डीजल: वैट कम कर गुजरात-हरियाणा के बराबर दाम करने का वादा पूरा नहीं हुआ, जनता आज भी महंगा तेल खरीद रही है। प्रमुख बिंदु 2: राजस्थान - विनाश की ओर (आर्थिक कुप्रबंधन) कर्ज का बोझ: सरकार 'कर्ज लो और घी पियो' की नीति पर चल रही है। 2 साल में 1.55 लाख करोड़ का कर्ज बढ़ा है। हर राजस्थानी पर अब 1 लाख रुपये का कर्ज है। विकास से ज्यादा ब्याज पर खर्च: यह बेहद चिंताजनक है कि सरकार ने विकास कार्यों (Capital Expenditure) पर केवल 15,397 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि उससे कहीं ज्यादा 19,676 करोड़ रुपये केवल ब्याज चुकाने में खर्च कर दिए। प्रदेश का विकास ठप है। डबल इंजन फेल: केंद्र से 39,193 करोड़ की उम्मीद थी, मिले केवल 7,171 करोड़ (18%)। बजट घोषणाएं: कुल 2,717 घोषणाओं में से मात्र 754 (27%) पूरी हुई हैं। 72% से अधिक घोषणाएं या तो अधूरी हैं या उन पर काम ही शुरू नहीं हुआ। प्रमुख बिंदु 3: कानून व्यवस्था - अपराधी मस्त, जनता त्रस्त गंभीर अपराध (अगस्त 23 - जुलाई 25): 39,974 मामले दर्ज। सजा की दर (Conviction Rate): मात्र 0.4%। भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार अभियोजन स्वीकृति नहीं दे रही है, जबकि कांग्रेस सरकार ने 1800 से अधिक स्वीकृतियां दी थीं। प्रमुख बिंदु 4: अरावली का विनाश (रेगिस्तान के लिए रेड कार्पेट) नेता प्रतिपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार की गई अरावली की नई परिभाषा (100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ी अरावली नहीं) का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 90% अरावली 100 मीटर से कम है। यह फैसला अरावली को खत्म कर खनन माफियाओं को लीगल परमिट देने जैसा है। यह फैसला राजस्थान को रेगिस्तान बनाने का षड्यंत्र है, जिसका कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। प्रमुख बिंदु 5: रिफाइनरी - श्रेय की चोरी भाजपा ने 2014-18 के बीच रिफाइनरी का काम रोककर इसकी लागत 37 हजार करोड़ से बढ़ाकर 79 हजार करोड़ कर दी, जिससे जनता पर 40 हजार करोड़ का बोझ पड़ा। जिस 90 प्रतिशत काम का श्रेय आज सरकार ले रही है, वह कांग्रेस सरकार की देन है। बजट में अगस्त 2025 में उत्पादन शुरू करने का लिखित वादा अब झूठ साबित हो गया है। प्रमुख बिंदु 6: कांग्रेस के 5 साल vs भाजपा के 2 साल मुख्यमंत्री द्वारा 5 साल बनाम 2 साल की तुलना को 'बेमानी' बताते हुए श्री जूली ने कहा: कोरोना प्रबंधन: कांग्रेस ने 2 साल कोरोना के बावजूद ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं होने दी, जबकि आज सामान्य दिनों में अस्पतालों में अव्यवस्था है। शिक्षा: कांग्रेस ने 5 साल में 310 कॉलेज और 7 यूनिवर्सिटी खोलीं। भाजपा ने 2 साल में एक भी नई यूनिवर्सिटी नहीं खोली, बल्कि 3 मेडिकल कॉलेज बंद कर दिए। योजनाएं: चिरंजीवी, ओपीएस, राइट टू हेल्थ और गिग वर्कर एक्ट जैसे जनकल्याणकारी फैसलों को इस सरकार ने या तो बंद कर दिया या अटका दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह सरकार केवल होर्डिंग और विज्ञापनों में चल रही है। धरातल पर किसान, युवा और आमजन परेशान हैं। सरकार को झूठे आंकड़े पेश करने के बजाय जनता से माफी मांगनी चाहिए। नेशनल हेराल्ड: कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पक्ष में दिल्ली की अदालत के नेशनल हेराल्ड मामले में दिए फैसले का स्वागत करते हुए जूली ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा राहुल गांधी और सोनिया गांधी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया था। इस फैसले से एक बार फिर दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है और नरेंद्र मोदी द्वारा रचा गया षड्यंत्र पूरे देश के सामने आ गया है। मनरेगा: मनरेगा का नाम बदले जाने को लेकर भी जूली ने इस योजना में बदलाव को मजदूरों के साथ बड़ा धोखा बताया। उन्होंने कहा, "भाजपा वाले गांधी जी के आदर्शों की बातें तो करते हैं लेकिन इनकी सोच एकदम गोडसे वाली है, मनरेगा योजना के साथ जो अभी हुआ है, ये मजदूरों के साथ बड़ा धोखा है।" स्टिंग ऑपरेशन: एक अख़बार द्वारा विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन के मुद्दे पर जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की कि इस पूरे मामले की जांच करवाएं ताकि सच सामने आ सके एवं जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता कायम रह सके। इस प्रेस वार्ता में उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा, चीफ व्हिप रफीक खान और प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रोहित बोहरा भी मौजूद रहे।

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