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नकली घी के रैकेट का खुलासा, 2 गिरफ्तार

नकली घी के रैकेट का खुलासा, 2 गिरफ्तार

सूरत। सूरत में अधिकारियों ने मिलावटी घी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सचिन जीआईडीसी क्षेत्र में एक निर्माण प्लांट पर छापा मारकर 2,029 किलोग्राम नकली घी जब्त किया और दो लोगों को गिरफ्तार किया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने गुरुवार को 'ऑपरेशन शुद्धि' के तहत यह कार्रवाई शहर के कुछ हिस्सों में नकली घी की बिक्री की सूचना मिलने के बाद की। सूचना के आधार पर कई टीमों का गठन किया गया और तकनीकी निगरानी तथा खुफिया जानकारी के जरिए आरोपियों की पहचान की गई।
इसके बाद सचिन जीआईडीसी स्थित ‘सबका फूड्स’ नाम की फैक्ट्री और चोर्यासी तालुका के तलांगपुर स्थित एक गोदाम पर छापा मारा गया।
पुलिस ने मिलावटी घी, मशीनरी, कच्चा माल और अन्य सामान बरामद किया, जिसकी कुल कीमत करीब 36,36,530 रुपए बताई गई है। इसमें से 14,19,960 रुपए का घी और 21,61,570 रुपए की मशीनरी व अन्य सामान शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान नकदी और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 48 वर्षीय भरत पोलारा और 45 वर्षीय आमीन वधवानिया के रूप में हुई है, जो दोनों व्यवसायी हैं।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ सचिन जीआईडीसी थाने में मामला दर्ज किया है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी मिलावट का एक व्यवस्थित तरीका अपनाते थे, जिसमें शुद्ध घी में पाम ऑयल, वेजिटेबल घी और वेजिटेबल बटर मिलाया जाता था।
घी की असली गंध और रंग दिखाने के लिए कृत्रिम एसेंस और सिंथेटिक रंग का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे इसे असली गाय के घी जैसा बनाया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इसमें सुई और सिरिंज की मदद से रसायनों की सटीक मात्रा मिलाई जाती थी, जिससे असली और नकली घी में फर्क करना मुश्किल हो जाता था।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे ग्राहकों की मांग के अनुसार अलग-अलग क्वालिटी का घी बनाते थे। कम कीमत वाला घी ज्यादातर तेल से बनता था, जबकि महंगे वर्जन में थोड़ा असली घी मिलाया जाता था।
यह घी 600 से 650 रुपए प्रति किलो के थोक भाव में बेचा जाता था और आगे 1000 रुपए प्रति किलो तक खुदरा बाजार में बिकता था।
पुलिस उपायुक्त राजदीपसिंह नकुम ने बताया कि आरोपी पिछले दो साल से यह अवैध काम कर रहे थे और ग्राहक की मांग के अनुसार मिलावटी घी तैयार कर बेचते थे।
यह घी ‘विदुर काऊ घी’ और ‘देसी घी’ जैसे नामों से पैक किया जाता था और छोटे पाउच से लेकर 15 किलो के डिब्बों में बेचा जाता था।
पुलिस को शक है कि यह सप्लाई नेटवर्क दक्षिण गुजरात और आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ था। मामले की आगे जांच जारी है।

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