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यूपीआई का बढ़ता दायरा, नए शुल्क से निवेश को रफ्तार

यूपीआई का बढ़ता दायरा, नए शुल्क से निवेश को रफ्तार

नई दिल्ली। भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) बीते एक दशक में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदलने वाले प्रमुख प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई पर 24,161.69 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि 314.23 लाख करोड़ रुपये रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत के डिजिटल भुगतान लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत रही।

यूपीआई के लगातार बढ़ते इस्तेमाल के बीच अब इसके आर्थिक मॉडल में भी बदलाव हुआ है। नए ढांचे के तहत चुनिंदा बड़े व्यापारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया गया है। हालांकि, इसका असर आम लोगों के सामान्य यूपीआई भुगतान पर नहीं पड़ेगा। सरकार के अनुसार व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से बाहर हैं। छोटे व्यापारियों के लिए भी निर्धारित श्रेणी में शून्य MDR जारी रहेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई के विशाल भुगतान नेटवर्क के संचालन और आगे के विस्तार के लिए एक टिकाऊ आर्थिक आधार तैयार करना है। सरकार के मुताबिक MDR से मिलने वाली राशि सरकार या NPCI के पास राजस्व के रूप में नहीं जाती, बल्कि बैंक और भुगतान ऐप जैसे भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न हिस्सेदारों के बीच वितरित होती है। इससे नेटवर्क के संचालन और विस्तार में मदद मिलने की बात कही गई है।

यूपीआई की वृद्धि का अंदाजा इसके शुरुआती दौर और मौजूदा आंकड़ों की तुलना से लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई पर केवल 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ के करीब पहुंच गई। इसी अवधि में लेनदेन का सालाना मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया।

2026 में भी यूपीआई का विस्तार जारी रहा। मई में पहली बार मासिक लेनदेन 2,300 करोड़ के पार गया और जुलाई में 2,366 करोड़ लेनदेन का रिकॉर्ड बना। जुलाई 2026 तक 741 बैंक यूपीआई से जुड़े थे। वहीं, प्लेटफॉर्म 11 देशों में भी परिचालन कर रहा था।

यूपीआई के बढ़ते पैमाने के साथ साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और भुगतान से जुड़े विवादों के समाधान की जरूरत भी बढ़ रही है। सरकार पहले ही जोखिम आधारित लेनदेन सीमाओं और यूपीआई एप्लिकेशन के लिए सुरक्षा संबंधी उपायों को बढ़ाने जैसी पहल का उल्लेख कर चुकी है। ऐसे में भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी इसकी बढ़ती पहुंच को दर्शाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का यह भुगतान नेटवर्क 11 देशों में उपलब्ध है। इससे विदेश जाने वाले भारतीय पर्यटकों, कारोबारी यात्रियों और छात्रों को कुछ बाजारों में भारतीय बैंक खातों से सीधे भुगतान करने की सुविधा मिलती है।

आने वाले समय में यूपीआई के विस्तार के साथ इसके बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और नई भुगतान सेवाओं में निवेश महत्वपूर्ण रहेगा। नए शुल्क ढांचे से आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को सुरक्षा देने के साथ बड़े व्यापारी लेनदेन से भुगतान नेटवर्क के संचालन और विस्तार की लागत में योगदान लेने की व्यवस्था की गई है। इस तरह यूपीआई अब सिर्फ तेज भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का बड़ा हिस्सा बन चुका है।

 

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