भजनलाल का जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त एक्शन
जयपुर। सरकार ने ऐसे मामलों में भी दंडात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी है, जिनमें अधिकारियों पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से संपर्क रखने या अवैध गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों से अनुचित लाभ लेने के आरोप प्रमाणित हुए। अवैध बजरी खनन से जुड़े लोगों से कथित सांठगांठ के मामले में तत्कालीन वृत्ताधिकारी की चार वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा, आपराधिक मामलों में उचित अनुसंधान नहीं करने पर संबंधित पुलिस टीम के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अपराधियों से निकटता रखने, मिलीभगत करने और इनामी अपराधियों को गिरफ्तार नहीं करने के मामलों में भी संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की वेतन वृद्धि रोकने की मंजूरी दी गई।
सरकारी कामकाज में लापरवाही पर भी दंड
राज्य सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यों के निरीक्षण और रखरखाव में लापरवाही के मामले में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय तक स्वेच्छा से अनुपस्थित रहने के तीन मामलों में संबंधित चिकित्सा अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई की गई।
गलत ब्लड इश्यू करने के गंभीर प्रकरण में एक चिकित्सा अधिकारी की दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने का निर्णय लिया गया। वहीं, श्रम, उद्यान और सचिवालय सेवा से जुड़े अधिकारियों के मामलों में आरोप प्रमाणित होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
वित्तीय अनियमितताओं में पेंशन पर रोक
सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़े मामलों में भी सरकार ने कार्रवाई की मंजूरी दी है। राजस्थान लेखा सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी पर निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने और राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप प्रमाणित हुए। इसके बाद उनकी देय पेंशन का 100 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रोकने की कार्रवाई की गई।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामलों में आवासीय और वाणिज्यिक भूखंडों को कृषि भूमि के रूप में दर्शाकर वित्तीय नुकसान पहुंचाने तथा अवैध भू-रूपांतरण से जुड़े आरोप सामने आए। इन मामलों में पेंशन की 20 प्रतिशत राशि पांच साल तक रोकने की मंजूरी दी गई।
पंचायत समिति के कार्यों में बिना काम कराए फर्जी भुगतान और राजकोष को नुकसान पहुंचाने के मामले में एक विकास अधिकारी तथा सहायक अभियंता के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, खनिज, कॉलेज शिक्षा और देवस्थान विभाग से जुड़े मामलों में भी निर्णय लिए गए।
आठ मामलों में अधिकारियों को दोषमुक्ति
सरकार ने विभागीय कार्रवाई के साथ उन मामलों पर भी निर्णय लिया, जिनमें आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत ऐसे आठ प्रकरणों में अधिकारियों को दोषमुक्त करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
राज्य सरकार के अनुसार, इन निर्णयों का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही तय करना, सरकारी संसाधनों के संरक्षण पर जोर देना और लोकसेवा से जुड़े दायित्वों के प्रति गंभीरता सुनिश्चित करना है।