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रूसी ईंधन पर प्रतिबंध को लेकर ट्रंप ने उठाए सवाल, बोले- कानून देखूंगा

रूसी ईंधन पर प्रतिबंध को लेकर ट्रंप ने उठाए सवाल, बोले- कानून देखूंगा

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह इस कानून को देखेंगे, लेकिन इसके साथ ही किसी बदलाव या प्रतिबंध हटाने का ऐलान नहीं किया। ट्रंप की यह टिप्पणी रूसी डीजल से जुड़े एक टैंकर और अमेरिकी प्रशासन की ओर से दी गई विशेष मंजूरी पर उठे सवालों के बीच आई है।

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक रिपोर्टर ने ट्रंप से अटलांटिक के रास्ते अमेरिका की ओर आ रहे उस टैंकर के बारे में पूछा, जिसमें कथित तौर पर रूसी डीजल ले जाया जा रहा था। रिपोर्टर ने यह भी सवाल किया कि 2022 के अमेरिकी कानून के तहत ऐसे ईंधन को अमेरिका में उतारने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।

इस पर ट्रंप ने पहले पूछा कि क्या यह मामला जोन्स एक्ट से जुड़ा है। जब रिपोर्टर ने स्पष्ट किया कि सवाल रूस से तेल आयात पर रोक लगाने वाले कानून का है, तो ट्रंप ने कहा, "शायद यही इसे काफी खराब कानून बनाता है। मैं इसे जरूर देखूंगा।"

हालांकि, राष्ट्रपति के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कानून में किस तरह का बदलाव हो सकता है या प्रशासन अपनी ओर से दी गई मंजूरी को मौजूदा प्रतिबंधों के साथ कैसे लागू करेगा। उन्होंने यह भी नहीं कहा कि रूस से ईंधन आयात पर लगी रोक समाप्त की जा रही है।

दरअसल, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने 9 अक्टूबर को जनरल लाइसेंस 135 जारी किया था। इसके तहत रूस से जुड़े कुछ प्रतिबंधों के बावजूद रूसी मूल के डीजल की बिक्री, डिलीवरी, उतराई और आयात से संबंधित कुछ लेनदेन को अनुमति दी गई। इस लाइसेंस में अमेरिका में आयात को भी शामिल किया गया है और इसकी वैधता 7 अप्रैल 2027 तक निर्धारित है।

हालांकि, इस मंजूरी का दायरा सीमित है। यह केवल डीजल से जुड़े निर्धारित लेनदेन पर लागू होती है। इसे रूस के सभी पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार को दोबारा खोलने की सामान्य अनुमति नहीं माना जा सकता। लाइसेंस में रूस के केंद्रीय बैंक, राष्ट्रीय संपत्ति कोष और वित्त मंत्रालय के अमेरिकी वित्तीय संस्थानों में रखे खातों से धन निकालने पर भी रोक का प्रावधान है।

दूसरी ओर, 8 अप्रैल 2022 को हस्ताक्षरित अमेरिकी कानून रूसी तेल के आयात पर अलग से प्रतिबंध लगाता है। इसके तहत अमेरिकी टैरिफ अनुसूची के अध्याय 27 में वर्गीकृत रूसी उत्पादों का आयात प्रतिबंधित है। कानून में इस रोक को समाप्त करने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया भी दी गई है।

इस प्रक्रिया के अनुसार, राष्ट्रपति को प्रमाणित करना होगा कि यूक्रेन ने रूसी वापसी और शत्रुता समाप्त करने से जुड़े समझौते को मंजूरी दी है। इसके साथ ही नाटो सदस्य देशों के लिए रूस की ओर से तत्काल सैन्य खतरा नहीं होने और यूक्रेन के नागरिकों के अपनी सरकार चुनने के अधिकार को मान्यता दिए जाने से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं। इसके बाद कांग्रेस की संबंधित समितियों से परामर्श और 90 दिनों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस दौरान कांग्रेस अस्वीकृति का प्रस्ताव भी पारित कर सकती है।

ट्रेजरी विभाग के जारी लाइसेंस में इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के पूरा होने का उल्लेख नहीं है। इसी वजह से प्रशासन की मंजूरी और संघीय कानून के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ट्रंप की टिप्पणी से तीन दिन पहले, 2 नवंबर को न्यू जर्सी की गवर्नर मिकी शेरिल ने बंदरगाह और टर्मिनल संचालकों को पत्र लिखकर इस मंजूरी पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि रूसी ईंधन के आयात को अनुमति देना सीधे संघीय कानून के खिलाफ है।

शेरिल का तर्क है कि कानून ने अमेरिकी कार्यपालिका को लाइसेंस जारी करके आयात प्रतिबंध को व्यापक रूप से दरकिनार करने का अधिकार नहीं दिया है। उन्होंने कारोबारियों को ऐसे ईंधन की खेप स्वीकार करने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि न्यू जर्सी सरकार इन आयातों का विरोध करने के लिए उपलब्ध कानूनी और नियामक विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।

फिलहाल ट्रंप ने कानून की समीक्षा की बात कही है, लेकिन रूसी ईंधन आयात पर अमेरिकी नीति में किसी औपचारिक बदलाव का संकेत नहीं दिया है।

 

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