पराग्वे के राष्ट्रपति की कुर्सी गई! महाभियोग के बाद गिरफ्तारी का खतरा
असुनसियन। दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में बैंकिंग घोटाले ने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। यूएनो बैंक मामले में घिरे राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को सीनेट के फैसले के बाद अपना पद गंवाना पड़ा है। उनके खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई के दौरान सीनेट में मौजूद सभी 44 सदस्यों ने उन्हें पद से हटाने के पक्ष में मतदान किया।
इस घटनाक्रम के बाद मामला और गंभीर हो गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अभियोजकों ने बैंक के डूबने से जुड़े विश्वासघात और अन्य अपराधों के आरोपों में पेना को हिरासत में लेने का आदेश जारी किया है। यह आदेश राष्ट्रीय पुलिस को कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
क्या है यूएनो बैंक घोटाला?
पराग्वे में यूएनो बैंक के डूबने के बाद लाखों ग्राहकों की मुश्किलें बढ़ गई थीं। बैंकिंग संकट के कारण करीब 30 लाख ग्राहक अपने खातों से पैसे नहीं निकाल पा रहे थे। इस मामले ने देश की वित्तीय व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, सैंटियागो पेना पर निजी बैंक से जुड़े हितों के टकराव, नियमों में हेरफेर और पेंशन फंड के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बैंकिंग मामले में सरकारी अधिकारियों के कथित हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठे थे।
इस्तीफे की कोशिश भी नहीं आई काम
महाभियोग की कार्रवाई तेज होने के बीच पेना ने गुरुवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। माना जा रहा है कि उन्होंने पद छोड़कर महाभियोग की प्रक्रिया से बचने की कोशिश की थी।
हालांकि, सीनेट ने उनके इस्तीफे को स्वीकार करने के पक्ष में मतदान नहीं किया। इस मुद्दे पर 24-20 से फैसला हुआ। इसके बाद कांग्रेस के संयुक्त सत्र में आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि कई सांसदों के सदन से बाहर चले जाने के कारण जरूरी कोरम पूरा नहीं हुआ।
इससे पहले पराग्वे की संसद के निचले सदन चैंबर ऑफ डेप्युटीज ने पेना के खिलाफ महाभियोग के आरोपों को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद सीनेट में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया था।
बचाव के लिए मांगा था अतिरिक्त समय
राष्ट्रपति पेना ने महाभियोग के आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। उनका कहना था कि उन्हें गुरुवार देर रात ही आरोपों की जानकारी मिली, इसलिए अपना बचाव तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।
हालांकि, सीनेट के मुताबिक, पेना खुद अपना पक्ष रखने के लिए पेश नहीं हुए। इसके बाद सदन ने मामले से जुड़े सबूतों की समीक्षा शुरू कर दी। बाद में उनके बचाव पक्ष के वकील कांग्रेस पहुंच गए।
पद जाने के साथ खत्म हुए कई विशेषाधिकार
पराग्वे के संविधान में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए पूर्व राष्ट्रपतियों को कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत उन्हें सीनेट में आजीवन सीट और संसदीय छूट मिलती है, लेकिन यह सुविधा महाभियोग की सुनवाई में दोषी नहीं ठहराए जाने की शर्त से जुड़ी है।
ऐसे में पद से हटाए जाने और महाभियोग की कार्रवाई के बाद सैंटियागो पेना के सामने कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। अब उनकी नजर संभावित गिरफ्तारी और बैंकिंग घोटाले की जांच में आगे होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।
पराग्वे का यह घटनाक्रम केवल एक राष्ट्रपति के राजनीतिक भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने देश की बैंकिंग व्यवस्था, सरकारी जवाबदेही और राजनीतिक स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।