विदेशी निवेशकों के लिए बाजार पहुंच आसान करेगा सेबी
मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने और निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में कई सुधारों पर काम कर रहा है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने मंगलवार को कहा कि नियामक का फोकस विदेशी निवेशकों के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग, कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार और नए निवेश उत्पादों को मजबूत करने पर है।
मुंबई में आयोजित जेपी मॉर्गन इंडिया कॉन्फ्रेंस में पांडे ने कहा कि विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को और सरल बनाने पर काम चल रहा है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव बाजार में अधिक भागीदारी देने और REITs तथा InvITs की इकाइयों के खिलाफ डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी करने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है।
पांडे के मुताबिक, विदेशी निवेशकों के लिए नियामक का जोर निवेश की पूरी प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाओं को कम करने पर है। इसके लिए ऑनबोर्डिंग को ज्यादा तेज, डिजिटल और जोखिम आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
205 एफपीआई ने अपनाया नया फ्रेमवर्क
सेबी चेयरमैन ने स्वागत-FI फ्रेमवर्क का भी उल्लेख किया। यह व्यवस्था अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले और भरोसेमंद विदेशी निवेशकों के लिए तैयार की गई है। 1 जून 2026 को इसके लागू होने के बाद से करीब 205 एफपीआई इसका इस्तेमाल कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि नामित डिपॉजिटरी प्रतिभागियों ने डिजिटल वर्कफ्लो और एपीआई आधारित सिस्टम को अपनाना शुरू कर दिया है। इससे विदेशी निवेशकों के पंजीकरण और ऑनबोर्डिंग में लगने वाला समय कम करने में मदद मिली है।
सेबी अब ऐसे तकनीक आधारित समाधानों को बाजार के दूसरे हिस्सों में भी व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है। नियामक के मुताबिक, आसान बाजार पहुंच और ज्यादा निवेशक भागीदारी के साथ बाजार की मजबूती भी उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
म्यूचुअल फंड और डेरिवेटिव्स पर भी नजर
म्यूचुअल फंड क्षेत्र में सेबी नकद बाजार में म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए नेट सेटलमेंट ऑफ फंड्स की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। इसके अलावा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट कीमतों से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की जा रही है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू किए जाने के बाद इस विषय पर आगे की समीक्षा की जा रही है। सेबी इस संबंध में पहले ही एक परामर्श पत्र जारी कर चुका है।
पांडे ने कहा कि नियामक नकद बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के साथ सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म को मजबूत करने पर भी काम कर रहा है। हेजिंग और आर्बिट्राज गतिविधियों को बढ़ावा देने से बाजार में प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में बढ़ेगी तरलता
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को लेकर भी सेबी कई स्तरों पर काम कर रहा है। पांडे ने बताया कि बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए मार्केट मेकिंग फ्रेमवर्क पर काम चल रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों के लिए बॉन्ड बाजार तक पहुंच आसान करना और रेपो बाजार के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा सेबी फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स की शुरुआत को लेकर भी परामर्श कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए विनियमित ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स की मदद से ज्यादा निवेशकों तक बॉन्ड निवेश पहुंचाने का लक्ष्य है।
निवेशकों को ऋण साधनों से जुड़े जोखिमों को बेहतर तरीके से समझाने के लिए क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर ढांचा लाने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे निवेशकों को विभिन्न ऋण उत्पादों के जोखिम स्तर को समझने में मदद मिल सकती है।
सेबी के इन प्रस्तावित सुधारों का व्यापक फोकस बाजार तक पहुंच को सरल बनाने, डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ाने, निवेशकों की भागीदारी मजबूत करने और अलग-अलग वित्तीय बाजारों में तरलता तथा दक्षता सुधारने पर है।