RSLSA की अनूठी पहल “Transformative Tuesdays: Navigating Life Legally”
प्रदेश के 1400 विद्यालयों में 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी विधिक जागरूकता —साइबर सुरक्षा पर विशेष फोकस, स्कूलों में लगेंगी ‘कोर्ट वाली दीदी’ शिकायत पेटियां
जयपुर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) द्वारा कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों में विधिक जागरूकता, संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित करने के उद्देश्य से राज्यव्यापी अभियान “Transformative Tuesdays: Navigating Life Legally” संचालित किया जा रहा है। सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने बताया कि यह अभियान माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से प्रारंभ किया गया है। अभियान का लोकार्पण माननीय उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति सूर्यकांत द्वारा दिनांक 20 फरवरी को साइबर लॉ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस के अवसर पर किया गया था, जबकि अभियान का प्रदेशव्यापी क्रियान्वयन दिनांक 7 अप्रैल 2026 से प्रारंभ किया जा रहा है। सदस्य सचिव अत्री ने बताया कि अभियान के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 1400 न्यायिक अधिकारी (जिला न्यायाधीश से लेकर कनिष्ठ स्तर तक) चिन्हित 1400 विद्यालयों में विशेष विधिक जागरूकता सत्र आयोजित करेंगे। इन सत्रों के माध्यम से एक ही दिन में 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचकर उन्हें दैनिक जीवन से जुड़े कानूनों, संवैधानिक अधिकारों, विधिक सहायता, बाल अधिकार, महिला अधिकार, साइबर अपराध से बचाव तथा जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषयों पर व्यवहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी। यह पहल विद्यार्थियों को विधिक रूप से जागरूक बनाने के साथ-साथ उनमें उत्तरदायित्व एवं विधि के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान हेतु विद्यालयों में ‘कोर्ट वाली दीदी’ नामक विशेष शिकायत एवं सुझाव पेटियां स्थापित की जाएंगी, जिनके माध्यम से विद्यार्थी अपनी किसी भी विधिक समस्या, शिकायत या जिज्ञासा को बिना पहचान बताए साझा कर सकेंगे। इन शिकायतों का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार विधिक परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान समय की चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए अभियान में साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। विद्यार्थियों को साइबर बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग आदि विषयों पर जागरूक किया जाएगा तथा “क्लिक करने से पहले सोचो” (Think Before You Click) थीम पर आधारित विधिक सामग्री एवं पुस्तिकाएं भी वितरित की जाएंगी। यह अभियान केवल एक दिवसीय कार्यक्रम न होकर एक सतत विधिक जागरूकता अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा। प्रत्येक मंगलवार को न्यायिक अधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं एवं विधिक स्वयंसेवकों द्वारा विद्यालयों में नियमित विधिक जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, अभियान की जानकारी एवं विधिक जागरूकता से संबंधित सामग्री डिजिटल माध्यमों एवं अभिभावकों के मोबाइल समूहों के माध्यम से भी प्रसारित की जाएगी, ताकि विधिक जागरूकता का यह अभियान समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँच सके। यह पहल विद्यार्थियों को विधिक रूप से सशक्त बनाने, उन्हें जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने तथा समाज में विधिक साक्षरता को एक जनआंदोलन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।