RBI ने ब्याज दरों पर नहीं छेड़ा हाथ, महंगाई पर नजर बरकरार
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने पर सहमति जताई है। साथ ही, नीति रुख (पॉलिसी स्टांस) को भी ‘न्यूट्रल’ रखा गया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने हालिया आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों का विस्तृत आकलन करने के बाद यह फैसला लिया। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की आवश्यकता महसूस नहीं की गई।
गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। बढ़ती तेल और ऊर्जा लागत का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहा है, जिससे आर्थिक विकास और महंगाई दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान वैश्विक दबावों का सामना करने की स्थिति में है। देश में आर्थिक गतिविधियां अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं और विभिन्न क्षेत्रों से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन में मजबूती बनी हुई है, जबकि कारोबारी विश्वास भी सकारात्मक स्तर पर बना हुआ है।
आरबीआई के अनुसार, खुदरा महंगाई अभी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे में है, लेकिन भविष्य में इसके बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का पूरा असर अभी घरेलू बाजार तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा हालात में जल्दबाजी में ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय आर्थिक संकेतकों का और इंतजार करना बेहतर होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आरबीआई आगे भी आंकड़ों के आधार पर फैसले लेगा और महंगाई के साथ-साथ आपूर्ति पक्ष से जुड़े जोखिमों पर लगातार नजर रखेगा।
आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर भी केंद्रीय बैंक ने सकारात्मक तस्वीर पेश की। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुमान के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही। निजी खपत, निवेश गतिविधियों, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन ने इस वृद्धि को मजबूती दी है।
आरबीआई ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं का खर्च फिलहाल मजबूत बना हुआ है और निवेश गतिविधियों में भी रफ्तार देखने को मिल रही है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात क्षेत्र ने भी संतोषजनक प्रदर्शन किया है, जिससे अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है।
हालांकि, केंद्रीय बैंक ने मानसून से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया। यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है। बावजूद इसके, सरकार की विभिन्न कृषि और जल संरक्षण योजनाएं संभावित नुकसान को कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं।
आरबीआई का मानना है कि सेवा क्षेत्र की मजबूती, जीएसटी सुधारों का प्रभाव और रोजगार बाजार की स्थिरता शहरी खपत को आगे भी समर्थन देती रहेगी। लेकिन बढ़ती महंगाई घरेलू परिवारों की खर्च करने की क्षमता पर कुछ दबाव डाल सकती है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह आने वाले समय में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तय करेगा और फिलहाल सतर्क रुख बनाए रखेगा।