RBI गवर्नर का भरोसा, वैश्विक तनाव के बावजूद मजबूत बनी हुई है भारतीय अर्थव्यवस्था
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है। उन्होंने माना कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून जैसी परिस्थितियां चुनौती जरूर हैं, लेकिन देश की आर्थिक बुनियाद इन जोखिमों का सामना करने में सक्षम है।
दूरदर्शन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मल्होत्रा ने कहा कि भारत का बाह्य क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। सेवा निर्यात, प्रवासी भारतीयों से मिलने वाला रेमिटेंस, रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और नए व्यापार समझौते अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन कारकों से आने वाले समय में निर्यात और भुगतान संतुलन दोनों को लाभ मिलेगा।
रुपये की स्थिति पर बोलते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे कई देशों की मुद्राओं पर दबाव पड़ा है। ऐसे वैश्विक माहौल में भारतीय रुपये का प्रदर्शन अपेक्षाकृत संतुलित रहा है और इसे सामान्य माना जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देने, ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और यूरोपीय संघ व अमेरिका के साथ जारी व्यापार वार्ताओं से भी देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, संजय मल्होत्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ऐसे में नीति-निर्माताओं को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखते हुए 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनानी चाहिए।
महंगाई के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि फिलहाल खुदरा महंगाई लगभग 4 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है और हाल के मूल्य दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़े कारणों की वजह से हैं। आरबीआई ने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की महंगाई का असर चालू खाते के घाटे और घरेलू महंगाई दोनों पर पड़ सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून में खुदरा महंगाई (सीपीआई) 4.38 प्रतिशत रही, जो आरबीआई के 2 से 6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे के भीतर है। वहीं, केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होगी, जिसमें ब्याज दरों और आर्थिक स्थिति की समीक्षा की जाएगी।