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जोधपुर में राष्ट्र को समर्पित हुआ पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस सभागार

जोधपुर में राष्ट्र को समर्पित हुआ पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस सभागार

जोधपुर। राजस्थानी भाषा और साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान तथा राजस्थानी शब्दकोष के रचयिता पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस की स्मृति में निर्मित "पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस सभागार" का शुक्रवार को भव्य समारोह में लोकार्पण किया गया। बैंक ऑफ इंडिया और लालस भाईपा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समाज जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लेकर डॉ. लालस को श्रद्धांजलि अर्पित की।

समारोह में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संत श्री हरिराम शास्त्री ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान और आत्मा होती है। जो व्यक्ति अपनी मातृभाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए जीवन समर्पित करता है, उसका योगदान पीढ़ियों तक याद रखा जाता है। उन्होंने कहा कि डॉ. सीताराम लालस का कार्य राजस्थानी भाषा की विरासत को सहेजने में मील का पत्थर है।

मुख्य अतिथि और शहर विधायक अतुल भंसाली ने कहा कि डॉ. लालस ने अपने लंबे शोध और समर्पण से राजस्थानी भाषा को मजबूत आधार प्रदान किया। उनका तैयार किया गया राजस्थानी शब्दकोष केवल एक शब्द संग्रह नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपराओं और भाषाई धरोहर का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि डॉ. लालस का योगदान आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

बैंक ऑफ इंडिया, राजस्थान के जोनल मैनेजर देव शरण ने कहा कि इस पहल का हिस्सा बनना बैंक के लिए सम्मान की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सभागार साहित्य, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. आकांक्षा पालावत ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थानी भाषा के संरक्षण और संवर्धन की चर्चा जब भी होगी, डॉ. सीताराम लालस का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉ. लालस ने अपने लेखन और शोध के माध्यम से राजस्थान की लोक संस्कृति और इतिहास को सहेजने का उल्लेखनीय कार्य किया, जो सदैव अमर रहेगा।

कार्यक्रम में आयोजक हरिसिंह चारण भाटेलाई, कार्यक्रम संयोजक एवं मारवाड़ चारण सभा के कोषाध्यक्ष भीमसिंह लालस सहित साहित्यकार, शिक्षाविद, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने डॉ. सीताराम लालस के व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन करते हुए उनके योगदान को राजस्थानी भाषा और सांस्कृतिक विरासत का स्वर्णिम अध्याय बताया।

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