अब नहीं बेची जाएंगी सरकारी कंपनियां! निजीकरण को लेकर बदली सरकार की नीति
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए पेश बजट में केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियों (सीपीएसयू) के विनिवेश और उनके निजीकरण को लेकर रोडमैप पेश किया गया था, जिसके तहत रणनीतिक सेक्टर को छोड़ अन्य सभी सेक्टर के पीएसयू के निजीकरण की घोषणा की गई थी। वित्त मंत्रालय ने तब आइडीबीआई बैंक के अलावा दो अन्य सरकारी बैंक और एक सरकारी बीमा कंपनी के निजीकरण का प्रस्ताव रखा था। लेकिन समय के साथ पिछले चार साल में सरकार की रणनीति बदल गई है।
अब सरकार विनिवेश या निजीकरण से पैसा जुटाने की जगह इन सार्वजनिक कंपनियों से कमाई का लक्ष्य तय कर रही हैं। चालू वित्त वर्ष 2024-25 में विनिवेश या कंपनियों के निजीकरण से रकम प्राप्ति का कोई औपचारिक लक्ष्य नहीं रखा गया है। दूसरी तरफ, सीपीएसयू से चालू वित्त वर्ष में 56,260 करोड़ रुपये का लाभांश हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। 2023-24 में सीपीएसयू से लाभांश प्राप्ति का लक्ष्य 43,000 करोड़ रुपये था, जो संशोधित होने के बाद 50,000 करोड़ रुपये हो गया। अब इन सीपीएसयू से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अपना अहम योगदान देने के लिए कहा जा रहा है।