NBFC की अगली उड़ान, टेक्नोलॉजी और भरोसा होंगे ग्रोथ के इंजन
नई दिल्ली। देश के नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) के लिए आने वाले समय में विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मु ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, शहरीकरण और डिजिटल बदलाव वित्तीय क्षेत्र के इन संस्थानों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। हालांकि, इस विकास की अगली रफ्तार तकनीक के साथ ग्राहकों के भरोसे पर निर्भर करेगी।
7वें सीआईआई एनबीएफसी और एचएफसी समिट को संबोधित करते हुए मुर्मु ने कहा कि विकसित, समावेशी और तकनीकी रूप से सक्षम अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए देश में मजबूत और विविध क्रेडिट सिस्टम जरूरी है। ऐसे में एनबीएफसी की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने एनबीएफसी सेक्टर के विकास के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया। इनमें वित्तीय समावेशन बढ़ाना, अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करना और प्रोडक्ट की डिजाइन एवं डिलीवरी में लगातार इनोवेशन करना शामिल है। इन क्षेत्रों में बेहतर काम करके कंपनियां उन ग्राहकों तक भी वित्तीय सेवाएं पहुंचा सकती हैं, जो पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।
आंकड़ों का हवाला देते हुए डिप्टी गवर्नर ने बताया कि एनबीएफसी क्रेडिट बढ़कर नॉमिनल जीडीपी के करीब 16.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यह 15.9 प्रतिशत था। वहीं, शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की ओर से दिए जाने वाले क्रेडिट की तुलना में एनबीएफसी की हिस्सेदारी भी करीब 27 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 26 प्रतिशत थी।
मुर्मु ने हालांकि सेक्टर को तेज विस्तार के बीच सावधानी बरतने की सलाह भी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिक ग्रोथ हासिल करने के लिए अंडरराइटिंग के मानकों, एसेट क्वालिटी या ग्राहकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। संस्थानों का आकार और कामकाज जितना बढ़ेगा, उनके लिए अपनी बुनियादी व्यवस्थाओं को उतना ही मजबूत रखना जरूरी होगा।
डिजिटलाइजेशन के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल संस्थागत जवाबदेही को कमजोर करने के बजाय बेहतर निर्णय लेने में मदद के लिए किया जाना चाहिए। खासतौर पर डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।
डिप्टी गवर्नर ने साइबर सुरक्षा और कारोबारी निरंतरता को भी अहम बताया। उनका कहना था कि ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए संस्थानों को किसी भी तकनीकी या साइबर जोखिम से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करनी होगी।
मुर्मु ने यह भी कहा कि लंबे समय तक टिकाऊ कारोबार के लिए ग्राहक विश्वास सबसे जरूरी आधारों में से एक है। इनोवेशन और नए प्रोडक्ट विकसित करने की दौड़ में कमजोर और संवेदनशील ग्राहकों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, तकनीक और भरोसे का संतुलन ही एनबीएफसी सेक्टर की अगली विकास यात्रा को मजबूत आधार दे सकता है।