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फ्रांस में हिंसा पर मैक्रों सख्त, तोड़फोड़ करने वालों से वसूला जाएगा हर्जाना

फ्रांस में हिंसा पर मैक्रों सख्त, तोड़फोड़ करने वालों से वसूला जाएगा हर्जाना

पेरिस: फ्रांस में देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और दुकानों में लूटपाट करने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी। सरकार हिंसा से प्रभावित लोगों की मदद करेगी और नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों से भरपाई कराई जाएगी।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, टेलीविजन पर दिए संबोधन में मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिकों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच अंतर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जायज मांगों को लेकर आवाज उठाने वालों को तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि देश की व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश करने वालों को अपने कृत्यों की जिम्मेदारी लेनी होगी।

संकट प्रबंधन के लिए सरकार की बैठक

हिंसा के बाद हालात संभालने और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए फ्रांस सरकार ने कदम उठाने की बात कही है। मैक्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को विशेष संकट प्रबंधन बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसमें हिंसा से प्रभावित दुकानदारों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों को जल्द राहत देने के उपायों पर चर्चा होगी।

राष्ट्रपति ने सरकार को शनिवार की घटनाओं से सबक लेने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का निर्देश भी दिया। खासतौर पर खुफिया जानकारी जुटाने, संभावित हिंसा का पहले से आकलन करने और सुरक्षा तैयारियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

महंगाई और ईंधन की कीमतों से बढ़ी नाराजगी

फ्रांस में प्रदर्शन केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहे। इनके पीछे आम लोगों की आर्थिक परेशानियां भी प्रमुख वजह बताई गई हैं। मैक्रों ने स्वीकार किया कि महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में चिंता है। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने और आर्थिक दबाव कम करने के लिए प्रयास कर रही है।

शनिवार को देशभर में करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इनमें किसान, छात्र, जलवायु कार्यकर्ता और ट्रेड यूनियन के सदस्य शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने महंगे ईंधन, बढ़ती जीवनयापन लागत, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए।

हिंसा में 2,397 गिरफ्तार, करीब एक हजार सुरक्षाकर्मी घायल

फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन घटनाओं में 997 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के सदस्य घायल हुए, जिनमें सात की हालत गंभीर बताई गई है।

हिंसा की घटनाओं ने सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की चुनौती भी खड़ी कर दी है। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि हिंसा से प्रभावित पुलिसकर्मियों, स्थानीय प्रतिनिधियों और दुकानदारों को सरकार का समर्थन मिलेगा।

छात्रों और संगठनों से बातचीत की तैयारी

फ्रांस में सितंबर से छात्र लगातार बड़े प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र बेहतर शिक्षा सुविधाओं और पढ़ाई के माहौल में सुधार की मांग उठा रहे हैं। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि सरकार आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों, नियोक्ता संगठनों और सरकारी अधिकारियों से बातचीत करेगी।

इस बातचीत का उद्देश्य युवाओं की चिंताओं को समझना और समस्याओं के समाधान तलाशना होगा। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना, वहीं दूसरी ओर महंगाई, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतों पर ठोस कदम उठाना।

फ्रांस में हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि आर्थिक दबाव और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष व्यापक प्रदर्शन का रूप ले सकता है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई और बातचीत की पहल से यह तय होगा कि हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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