ईरान पर हमले को ट्रंप ने ठहराया जरूरी, बोले- परमाणु खतरा गंभीर था
वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी था। केंटकी में नॉर्दर्न केंटकी यूनिवर्सिटी के ट्रूइस्ट एरिना में आयोजित रिपब्लिकन चुनावी रैली में ट्रंप ने अपने प्रशासन की सैन्य कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि बताया।
ट्रंप ने समर्थकों से कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, क्योंकि उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में उनका इस्तेमाल किए जाने का खतरा गंभीर होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु ढांचे और हथियार बनाने की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट किए जाने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर सवाल बने हुए हैं।
'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते'
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान दोबारा परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल न कर सके। उन्होंने इस सैन्य अभियान को अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल की प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा उपलब्धियों में शामिल किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, उन्होंने अभियान के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली अमेरिकी सरकारों को इस समस्या का समाधान पहले ही कर देना चाहिए था।
हालांकि, ट्रंप के दावों और ईरान की वास्तविक परमाणु क्षमता के आकलन के बीच अंतर को लेकर विशेषज्ञों ने पहले भी सवाल उठाए हैं। फैक्टचेक.org की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों से ईरान की कुछ परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचा था, लेकिन उपलब्ध आकलनों से पूरे परमाणु कार्यक्रम और सभी क्षमताओं के पूरी तरह खत्म होने की पुष्टि नहीं होती।
आर्थिक नुकसान से ज्यादा अहम बताया सुरक्षा का मुद्दा
ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के खिलाफ अभियान के कारण अमेरिका को मध्य पूर्व में अतिरिक्त संसाधन और ध्यान लगाना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना आर्थिक प्रभावों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सैन्य अभियान समाप्त होने के बाद ऊर्जा की कीमतों में गिरावट आएगी। ट्रंप के अनुसार, पेट्रोल के दाम जल्द कम हो सकते हैं और तेल की कीमतों में भी राहत मिलने की संभावना है।
हालांकि, ईंधन की कीमतें केवल सैन्य कार्रवाई पर निर्भर नहीं करतीं। अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति, मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक बाजार की परिस्थितियां भी इन पर असर डालती हैं।
अमेरिकी सेना की ताकत का भी किया जिक्र
रैली में ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रशासन और रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस ने सेना के लिए एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग उपलब्ध कराई है।
उन्होंने अमेरिकी सैन्य ताकत को देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और सुरक्षा का अहम आधार बताया। ट्रंप ने ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के साथ वेनेजुएला और ग्रीनलैंड से संबंधित अपनी विदेश नीति पहलों का भी जिक्र किया।
उनका कहना था कि मजबूत सैन्य क्षमता अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरों का सामना करने में मदद करती है।
ईरान को लेकर आगे क्या होगा?
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि सैन्य अभियान जल्द समाप्त हो सकता है। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की नीति, क्षेत्रीय तनाव और भविष्य में संभावित कूटनीतिक बातचीत पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
फिलहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति अपने सैन्य अभियान को जरूरी बताते हुए इसका बचाव कर रहे हैं। दूसरी ओर, परमाणु सुविधाओं को हुए नुकसान और ईरान की भविष्य की परमाणु क्षमता को लेकर स्वतंत्र आकलन महत्वपूर्ण बने हुए हैं।