निर्माण क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग, दुनिया में बना नंबर-2 ग्रोथ इंजन
नई दिल्ली। वैश्विक निर्माण क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2030 के बीच दुनिया में होने वाली निर्माण गतिविधियों की वृद्धि में भारत दूसरा सबसे बड़ा योगदान देने वाला देश बनकर उभरा है। इस अवधि में चीन पहले स्थान पर है, जबकि अमेरिका तीसरे स्थान पर मौजूद है।
जर्मनी की वेंचर कैपिटल फर्म फाउंडामेंटल की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक निर्माण वृद्धि में चीन की हिस्सेदारी 26.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि भारत 14.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहेगा। अमेरिका का योगदान 11.1 प्रतिशत आंका गया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत और चीन मिलकर वैश्विक निर्माण वृद्धि का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा संभालेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पूंजीगत निवेश अब कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से केंद्रित हो रहा है। भारत, चीन, अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस ऐसे देश हैं जहां बड़े पैमाने पर निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश बढ़ रहा है।
वैश्विक स्तर पर निर्माण क्षेत्र में खर्च लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा करीब 15.97 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2028 तक इसके लगभग 19.86 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान उद्योग की औसत वार्षिक वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचा विकास आने वाले वर्षों में निर्माण क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा। दुनिया भर में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन भारत की रफ्तार इससे भी आगे है। अनुमान है कि दशक के अंत तक भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार हर साल करीब 8 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते उपयोग से डेटा सेंटर निर्माण की मांग में भारी उछाल आएगा। वर्ष 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर निर्माण बाजार 2018 की तुलना में लगभग दोगुना हो सकता है। यही वजह है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले वर्षों में निर्माण उद्योग के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार 2030 तक डेटा सेंटर निर्माण अकेले वैश्विक निर्माण बाजार में 10 से 15 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है। इससे तकनीक, ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में बड़े निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, औद्योगिक विकास, ऊर्जा परिवर्तन, डिजिटल क्रांति और तेजी से हो रहे शहरीकरण जैसे कई दीर्घकालिक विकास कारकों का एक साथ लाभ उठा रहा है। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निर्माण क्षेत्र की वृद्धि का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।