वेनेजुएला के तेल पर भारत की नजर, जल्द जाएगा तकनीकी दल
नई दिल्ली। भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच तेल और ऊर्जा संबंधों को लेकर व्यापक चर्चा की।
बैठक के बाद हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि वेनेजुएला हाल के महीनों में भारत के लिए कच्चे तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं का गहराई से अध्ययन करने के लिए भारत की एक तकनीकी टीम जल्द ही वेनेजुएला का दौरा करेगी।
पुरी ने कहा कि भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग कोई नया नहीं है। दोनों देशों के बीच वर्षों पुरानी साझेदारी रही है और वर्तमान परिस्थितियों में इसे और आगे बढ़ाने के अवसर मौजूद हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार दोनों देशों को एक-दूसरे का स्वाभाविक साझेदार बनाते हैं।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है, जबकि भारत के पास उस कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए मजबूत रिफाइनिंग क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि लैटिन अमेरिका में वेनेजुएला भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों का सहयोग ग्लोबल साउथ के लिए भी अहम महत्व रखता है।
बैठक में आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान कर दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित किए जाएं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों का मानना है कि मजबूत आर्थिक संबंध भविष्य में विकास और निवेश के नए रास्ते खोल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा क्षेत्र में यह सहयोग और गहरा होता है, तो भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी, वहीं वेनेजुएला को अपने तेल निर्यात के लिए एक बड़ा और स्थिर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।