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एफआईआई ने फरवरी में दिखाया भरोसा, 2.44 अरब डॉलर का नेट निवेश

एफआईआई ने फरवरी में दिखाया भरोसा, 2.44 अरब डॉलर का नेट निवेश

मुंबई। गुरुवार को जारी एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने फरवरी में 17 महीनों का सबसे बड़ा निवेश दर्ज किया। इस दौरान लगभग 2.44 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया गया।
फरवरी में एफआईआई ने सेकेंडरी मार्केट में करीब 2.14 अरब डॉलर और प्राइमरी मार्केट में 299 मिलियन डॉलर का निवेश किया, जो सितंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी मासिक शुद्ध खरीदारी है।
हालांकि, अक्टूबर 2023 से प्राइमरी मार्केट में एफआईआई की खरीदारी लगातार बनी हुई है, लेकिन जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच सेकेंडरी मार्केट में उनकी कुल निकासी 46 अरब डॉलर से ज्यादा रही। फरवरी में शुद्ध खरीदारी उस समय हुई जब महीने की शुरुआत में आईटी शेयरों में 1.21 अरब डॉलर की भारी बिकवाली देखी गई थी।
विश्लेषकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि फरवरी का निवेश पिछली बड़ी बिकवाली की तुलना में अभी छोटा है और यह ट्रेंड में स्थायी बदलाव के बजाय केवल अस्थायी ठहराव हो सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आईटी सेक्टर में बिकवाली जारी रही तो फिर से निकासी बढ़ सकती है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में वैल्यूएशन अब संतुलित हो गए हैं, जिससे आक्रामक बिकवाली की संभावना कम है।
पिछले एक महीने में सेंसेक्स में 1.08 प्रतिशत की बढ़त हुई है, जबकि निफ्टी 2.05 प्रतिशत चढ़ा है। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में क्रमशः 4.72 प्रतिशत और 5.10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
एक अन्य हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं और बेस केस अनुमान के तहत अगले 12 महीनों में निफ्टी 27,958 के स्तर तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत स्पष्टता, बड़े व्यापार समझौते और बुनियादी ढांचे पर लगातार जोर भारत की विकास गाथा को नए चरण में ले जा रहे हैं, जिससे विस्तार के अगले दौर की नींव तैयार हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते जैसे कदम अगले विकास चक्र के लिए अहम उत्प्रेरक साबित हो सकते हैं।
सेक्टोरल स्तर पर बैंकिंग और विविध वित्तीय कंपनियों को क्रेडिट ग्रोथ 13-14 प्रतिशत तक सामान्य होने और स्थिर एसेट क्वालिटी का फायदा मिल सकता है। वहीं, कैपिटल गुड्स और इंजीनियरिंग कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निवेश से लाभ उठा सकती हैं।

 

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