सीपीए ऑस्ट्रेलिया सर्वेक्षण : बढ़ती लागत पर भारी पड़ा भारतीय लघु उद्योगों का जज़्बा; कोविड के बाद हासिल की सबसे शानदार बढ़त
नई दिल्ली : सीपीए ऑस्ट्रेलिया के एशिया-प्रशांत लघु उद्योग सर्वेक्षण 2025/26 के अनुसार, भारतीय लघु उद्योगों ने वर्ष 2025 में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। 2019 के बाद से यह इनका सबसे दमदार प्रदर्शन रहा है। हालांकि, खर्चों के बढ़ते बोझ ने भविष्य की राह में कुछ चुनौतियां ज़रूर पेश की हैं, लेकिन 2026 में विकास को लेकर इन कारोबारियों का हौसला बुलंद है।
सीपीए ऑस्ट्रेलिया के फ़ेलो (एफसीपीए) और भारत में सीपीए ऑस्ट्रेलिया के प्रवक्ता, श्री अनिकेत तलाटी, ने कहा कि भारतीय एमएसएमई ने मजबूत घरेलू मांग के सहारे विस्तार की स्पष्ट तैयारी और आत्मविश्वास दिखाया है। उन्होंने कहा, “व्यवस्थित और विकास को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों के साथ-साथ मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए नए निर्यात बाजारों तक पहुंच बढ़ने से भारतीय एमएसएमई को आगे बढ़ने में मदद मिली है। शुल्कों के प्रभाव को कम करने में भी इन समझौतों की अहम भूमिका रही है। पिछले वर्ष भारतीय एमएसएमई ने मजबूत प्रदर्शन और आत्मविश्वास दिखाया, और 2026 में भी वे बड़े विस्तार की योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं।”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कारोबारी माहौल अब पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “मार्च के बाद से बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों के कारोबारी माहौल को प्रभावित किया है। ऊर्जा और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।”
श्री अनिकेत तलाटी ने अपनी बात रखते हुए कहा, "इसके साथ ही, रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव निर्यात से होने वाले मुनाफे को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। बेहतरीन गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों वाले भारतीय उत्पाद आज भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। हाल ही में हुए नए मुक्त व्यापार समझौतों ने निर्यात की संभावनाओं को लेकर भरोसे को और भी पुख्ता किया है। कुल मिलाकर, मैं भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के भविष्य को लेकर काफी सकारात्मक हूँ। हालांकि, आने वाले समय में विकास और लाभ की रफ्तार बनाए रखने के लिए व्यवसायों को बेहतर योजना, लागत और जोखिम के प्रभावी प्रबंधन, तथा नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक कच्चे माल में निवेश पर विशेष ध्यान देना होगा।"
सर्वेक्षण के आंकड़े गवाही देते हैं कि बीते साल 80 प्रतिशत भारतीय लघु उद्योगों ने तरक्की की राह पकड़ी, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 63 प्रतिशत के औसत के मुकाबले काफी आगे है। भविष्य पर नजर डालें तो, 87 प्रतिशत कारोबारियों को 2026 में अपना व्यवसाय और बढ़ने की उम्मीद है, जबकि 84 प्रतिशत अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर आश्वस्त हैं। अपने पड़ोसी देशों को पीछे छोड़ते हुए, भारत इस क्षेत्र के सबसे सकारात्मक लघु उद्योग बाजारों के रूप में उभरकर सामने आया है। वर्ष 2025 में मिली इस बड़ी कामयाबी के पीछे मुख्य रूप से बेहतर ग्राहक सेवा, कुशल प्रबंधन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का बड़ा हाथ रहा है।
मजबूत आत्मविश्वास के बावजूद, खर्चों का बढ़ता बोझ विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। सर्वेक्षण के अनुसार, 42 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बढ़ती लागत को 2025 की सबसे बड़ी चुनौती माना, जिसमें कच्चे माल की कीमतों ने लगातार तीसरे साल कारोबार को सबसे ज्यादा चोट पहुँचाई है।