कोहरे का चौतरफा कोहराम
देश के अनेक राज्य इस समय ठंड और कोहरे की चपेट में है। कोहरे से प्रतिदिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें बेहद चिंताजनक है। बढ़ते कोहरे के कारण सड़क हादसों की संख्या में इजाफा हो रहा है। आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सुबह और देर शाम घना कोहरा छाए रहने के कारण दृश्यता कम हो ही है, वहीं ठंडी हवाओं ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। ठंड और कोहरे का सबसे अधिक असर गरीब, दिहाड़ी मजदूरों, रोज कमाने खाने वालों ,बुजुर्गों और स्कूली बच्चों पर देखा जा रहा है। दिहाड़ी मजदूरों को सुबह-सुबह काम पर निकलना कठिन हो गया है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है। वहीं खेतों में काम करने वाले किसानों की गतिविधियां भी सीमित हो गई है। ठंड से अस्पतालों और क्लीनिकों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक ठंड, नमी और प्रदूषण के मेल से अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस और सांस की अन्य समस्याएं बढ़ रही हैं। भीषण सर्दी और कोहरे का असर रेलवे पर भी दिखने लगा है। ट्रेनें लगातार लेट हो रही हैं, जिसके कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोहरे के चलते विजिबिलिटी कम होती है, जिससे सड़क हादसे बढ़ जाते हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट ‘रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2021’ के अनुसार, पिछले सात वर्षों में कोहरे के कारण 7,994 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 5,740 लोगों की मौत हुई, जबकि 4,322 लोग घायल हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि घने कोहरे में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। तेज रफ्तार, गलत रोशनी और अनियंत्रित ड्राइविंग हादसों का कारण बनती हैं। इसलिए ड्राइवरों को सर्दियों में एक्सप्रेसवे पर यात्रा करते समय सही लाइट, नियंत्रित गति और पर्याप्त दूरी का पालन करना चाहिए।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कोहरा वास्तव में हवा में तैरती पानी या फिर बर्फ की बहुत ही महीन बूंदें हैं। नम ठंडी हवा का संपर्क जब ऊष्णता से होता है तो कोहरा बन जाता है। कोहरा धरती के बिलकुल करीब आ चुके बादल हैं। जब आर्द्र हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है तब जलवाष्प संघनित होकर जल की सूक्ष्म बूंदें बनाती है। कभी-कभी अनुकूल परिस्थितियों में हवा के बिना ऊपर उठे ही जलवाष्प जल की नन्हीं बूंदों में बदल जाती है तब हम इसे कोहरा कहते हैं। तकनीकी रूप से बूंदों के रूप में संघनित जलवाष्प के बादल को कोहरा कहा जाता है। सर्दियों में कैसे बनता है कोहरा? सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत के कई राज्य कोहरे की मोटी चादर में ढक जाते हैं । इसकी वजह से न केवल राहगीरों को बल्कि ट्रेन ड्राइवरों और एयरोप्लेंस के पायलटों तक को रास्ता ठीक से नहीं दिखाई देता। घने कोहरे के चलते लोगों को सुबह के वक्त गाड़ियों की लाइट जलानी पड़ती है । कोहरे के कहर ने सडकों पर दौड़ते वाहनों की न सिर्फ रफ्तार थम गयी बल्कि वाहनों में यात्रा करने बाले यात्रियों को दुर्घटनाओं का डर सताने लगा | वैसे तो इस मौसम में कोहरा पड़ना आम बात है लेकिन आखिर सर्दियों में इतना कोहरा आता कहाँ से है? देश के महानगरों में सर्दियों में ऊषाकाल एवं प्रातःकाल मे नमी वाले दिनों मे ऐसा कोहरा प्रायः छा जाता है। क्योंकि वायुमण्डल में धुआँ धूल एवं अन्य कण जल कणों को स्थिर रखने के लिए उपस्थित रहते है। इससे साइकिल या मोटर साइकिल चालक के कपडे़ नम हो जाते हैं। गांवों के मुकाबले शहरों में कोहरा अधिक घना होता है क्योंकि शहरों की हवा में धूल और धुएं के कण अधिक होते हैं। ये कोहरे में मौजूद पानी की बूंदों के साथ मिलकर इसे गहरा बना देते हैं।
कोहरा के बारे में बताया जाता है यह अच्छा और बुरा दोनों है। कोहरा अधिक समय तक न रहे और सूर्योदय के बाद जल्द खत्म हो जाए तो फसल तथा पौधों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे फसलों में नमी बनी रहती है। पानी में ऊष्माधारण क्षमता अधिक होती है और कोहरे में पानी की बूंदें होती हैं, इसलिए कोहरा होने पर टेम्प्रेचर माइल्ड रहता है, जो फसलों को लाभ पहुंचाता है। जमीन पर रेंगने वाले कई जीव खासकर रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले कोहरे से मिलने वाली पानी की बूंदों पर ही जीवित रहते हैं। तटीय इलाकों में रहने वाले कई लोग खेतों में फॉग नेट लगाते हैं, ताकि कोहरे से पानी की बूंदें टूटकर फसलों पर गिरें।
-बाल मुकुन्द ओझा