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किसी की कठपुतली नहीं बनेंगे युवा : शेखावत

किसी की कठपुतली नहीं बनेंगे युवा : शेखावत

जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश की युवा शक्ति पर भरोसा जताते हुए विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत का युवा कभी कठपुतली न था, न है और न कभी बनेगा। रविवार को शेखावत सर्किट हाउस में मीडिया से रू-ब-रू हुए। युवाओं से संबंधित सवाल पर शेखावत ने कहा कि भारत युवाओं का देश है। हमारी सरकार युवा शक्ति के सृजन, उनके सशक्तीकरण और उन्हें बराबर के अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज 'मुद्रा योजना', 'स्टार्टअप इंडिया' और 'स्टैंडअप इंडिया' जैसी तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसरों का सृजन किया जा रहा है, ताकि उनके लिए नए आयाम खड़े हो सकें। वे देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाकर तरक्की में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी पर स्थिति स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह किसी सरकार की इच्छा से नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी वैश्विक चुनौती और अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण हुआ है। वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूरे विश्व भर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के दाम 30 प्रतिशत से लेकर 130 प्रतिशत तक बढ़े हैं, जबकि एलपीजी और सीएनजी के दाम दुनिया भर में 30 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण पूरी वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिसका असर सभी देशों पर पड़ रहा है।शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि इस वैश्विक हाहाकार के बीच भी भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहां कीमतों में टोटल ग्रोथ 10 प्रतिशत से भी कम रही है। सरकार लगातार अपने संसाधनों को निवेश कर रही है ताकि इस संकट का पूरा भार देश की आम जनता और माताओं-बहनों पर न पड़े।कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अंडमान निकोबार दौरे और वहां संस्कृति व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री ने तीखा पलटवार किया। शेखावत ने कहा कि राहुल गांधी जी को पहले संस्कृति का 'स' सीखना चाहिए, उसके बाद ही उन्हें ऐसी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक चीजों पर कोई टिप्पणी करनी चाहिए।

बोतल से जिन्न बाहर ले आते हैं गहलोत

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 'हॉर्स ट्रेडिंग' वाले बयानों पर केंद्रीय मंत्री ने कड़ी कानूनी और राजनीतिक घेराबंदी की। उन्होंने कहा कि बंगाल में जनता ने भाजपा को दो-तिहाई से ज्यादा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने का आशीर्वाद दिया है, ऐसे में वहां भारतीय जनता पार्टी को हॉर्स ट्रेडिंग करने की भला क्या जरूरत पड़ेगी?केंद्रीय मंत्री शेखावत ने अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बंगाल का बहाना बनाकर राजस्थान के एक पुराने जिन्न को बोतल से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पिछले 10 साल के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जब-जब कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट जी को कोई नया दायित्व या पद देने का विचार करता है, ठीक उसी समय उनका रास्ता रोकने के लिए गहलोत साहब इस बोतल से जिन्न को बाहर ले आते हैं।

भ्रष्टाचार पर स्टैंड साफ करें गहलोत साहब

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस दावे पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि विधायकों को 10-10 करोड़ रुपए दिए गए और वो वापस भी नहीं हुए, शेखावत ने कानूनी तर्क देते हुए घेरा। उन्होंने पूछा कि अगर विधायकों ने पैसे लिए थे तो क्या वह भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता? मुख्यमंत्री रहते हुए अगर गहलोत साहब को इसकी जानकारी थी तो उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की? भारत की न्याय संहिता और 'एंटी करप्शन एक्ट' स्पष्ट कहता है कि अगर किसी जिम्मेदार व्यक्ति को भ्रष्टाचार की जानकारी मिले और वह कार्रवाई न करे तो वह भी कानूनन बराबरी का दोषी है। गहलोत साहब को अब जनता के सामने अपना स्टैंड साफ करना चाहिए कि उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की।

स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा पर संवेदनशीलता जरूरी

जोधपुर में स्वतंत्रता सेनानी फतेहराज कल्ला जी की प्रतिमा खंडित होने की घटना पर उन्होंने संवेदनशीलता बरतने की अपील की। शेखावत ने कहा कि जब कोई ढांचा या बिल्डिंग जर्जर होकर किसी दुर्घटना का शिकार हो जाती है तो उस पर राजनीति करना या ओछी राजनीतिक टिप्पणी करना बिल्कुल अनुकूल नहीं है। श्रद्धेय कल्ला जी पूरे शहर के लिए पूजनीय थे। हमारा पूरा ध्यान और प्रयास इस बात पर होना चाहिए कि उनकी भव्य मूर्ति वहां शीघ्र अति शीघ्र वापस सम्मानपूर्वक स्थापित हो और भविष्य में ऐसी परिस्थिति दोबारा न बने।

सर्किट हाउस में जनसुनवाई की

शेखावत ने सर्किट हाउस में जनसुनवाई भी की। उन्होंने कहा कि जब कभी भी वे अपने गृह नगर जोधपुर आते हैं तो यहां के लोगों से मिलना, उनकी जनसुनवाई करना, उनकी समस्याओं को सुनना और उनके विषयों का समाधान करना उनके दिनभर के स्वाभाविक कार्यक्रम की प्रक्रिया का हिस्सा है। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते यह उनका परम दायित्व है कि वे अपनी जनता के बीच रहकर उनके काम करें और वे केवल अपने इसी दायित्व की पूर्ति कर रहे हैं।

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