उपराष्ट्रपति बोले- मतभेद रहें, लेकिन संविधान सबसे ऊपर होना चाहिए
गयाजी। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र की मजबूती विचारों की विविधता से आती है, लेकिन सभी जनप्रतिनिधियों की सर्वोच्च जिम्मेदारी संविधान की भावना का सम्मान करते हुए जनता के हित में काम करना है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन विकास और जनकल्याण के मुद्दों पर सभी को एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।
वे गया स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) में 18वीं बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विधायकों से अपील की कि चुनावी प्रतिस्पर्धा समाप्त होने के बाद उनकी प्राथमिकता केवल जनता की सेवा और राज्य का विकास होना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य तेज़ी से आगे बढ़ेंगे। उनके अनुसार बिहार का समग्र विकास देश की प्रगति से सीधे जुड़ा हुआ है और विकसित बिहार के बिना विकसित भारत की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती।
अपने संबोधन में उन्होंने बिहार के ऐतिहासिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आपातकाल के विरोध तक बिहार ने देश की राजनीति को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में वे भी लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े थे और उस दौर के अनुभवों ने उनके सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक सोच को गहराई से प्रभावित किया।
राधाकृष्णन ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं को याद करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने समाज के गरीब और वंचित वर्गों की सेवा को अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि आज के जनप्रतिनिधियों को भी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सदन में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन संविधान सभी के लिए समान मार्गदर्शक है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए विधायी कार्य संविधान की भावना के अनुरूप होना आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने बदलते दौर में तकनीक की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीकों की जानकारी आज के जनप्रतिनिधियों के लिए बेहद जरूरी है। इससे विधानमंडल की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, प्रभावी और आधुनिक बन सकती है। उन्होंने अनुभवी विधायकों से भी नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट रखने की अपील की।
कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।