कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम ढहा, 5 की मौत; कई लोगों के फंसे होने की आशंका
Kolkata : दक्षिण कोलकाता के तारातला ट्रांसपोर्ट डिपो के समीप बुधवार दोपहर एक निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बड़ी संख्या में मजदूरों और कर्मचारियों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना करीब दोपहर 1:30 बजे हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे के समय गोदाम में कंक्रीट ढलाई का कार्य चल रहा था। अचानक ढांचा गिरने से वहां काम कर रहे लोग मलबे के नीचे दब गए। अब तक चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि अन्य को बचाने के लिए अभियान तेजी से जारी है।
घटना के बाद पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज, सिविल डिफेंस, डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप और सेना की टीमों को मौके पर तैनात किया गया। भारी मलबा हटाने के लिए क्रेन मंगाई गई है, वहीं लोहे की मजबूत छड़ों को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे के भीतर से अभी भी लोगों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, जिससे बचाव दलों ने अभियान और तेज कर दिया है। प्रशासन का पूरा फोकस अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
निर्माणाधीन इमारतों में हादसों के सामान्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार निर्माणाधीन ढांचे गिरने के पीछे कई तकनीकी और प्रबंधन संबंधी कारण हो सकते हैं। इनमें डिजाइन की खामियां, निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता और भार वहन क्षमता का गलत आकलन प्रमुख हैं।
इसके अलावा कंक्रीट के पूरी तरह मजबूत होने से पहले अतिरिक्त निर्माण कार्य करना, भारी मशीनों का उपयोग करना या अस्थायी सपोर्ट सिस्टम (शटरिंग और स्कैफोल्डिंग) में कमी भी बड़े हादसों की वजह बन सकती है।
कई बार स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण, इंजीनियरिंग मानकों की अनदेखी और नियमित तकनीकी निरीक्षण नहीं होने से भी जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और सिविल इंजीनियरों की निगरानी ऐसे हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।