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AI पर सुभाष घई की बड़ी बात, क्रिएटिविटी ही बनाएगी इंसान को खास

AI पर सुभाष घई की बड़ी बात, क्रिएटिविटी ही बनाएगी इंसान को खास

मुंबई। दिग्गज फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई ने एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उनका मानना है कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, इंसान की रचनात्मक सोच और भावनात्मक समझ की बराबरी नहीं कर सकती।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में सुभाष घई ने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई लोगों के कई मानसिक और बौद्धिक कार्यों को आसान बना सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मशीनें इंसान के भीतर मौजूद संवेदनाओं, कल्पनाशक्ति और रचनात्मक क्षमता की जगह नहीं ले सकतीं।

घई के अनुसार, भविष्य में वही लोग सबसे अधिक सफल होंगे जो अपनी क्रिएटिविटी को लगातार विकसित करते रहेंगे। उन्होंने संगीत, कविता, चित्रकला, संवाद कौशल, सहयोग की भावना और आलोचनात्मक सोच जैसे गुणों को इंसान की सबसे बड़ी ताकत बताया। उनका कहना है कि यही विशेषताएं मनुष्य को मशीनों से अलग पहचान देती हैं।

उन्होंने कहा कि केवल जानकारी हासिल करना पर्याप्त नहीं है। असली महत्व इस बात का है कि व्यक्ति उस जानकारी को किस तरह अपनी भावनाओं और रचनात्मक सोच के साथ जोड़ता है। जब ज्ञान और संवेदनशीलता का संतुलन बनता है, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता विकसित होती है।

सुभाष घई ने यह भी कहा कि कला, साहित्य और मानवीय मूल्यों से जुड़ाव व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाता है। ऐसे गुण न केवल व्यक्तिगत विकास में मदद करते हैं, बल्कि दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने एआई पर अपनी राय रखी हो। इससे पहले भी वह कई मौकों पर कह चुके हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक शक्तिशाली तकनीक है, लेकिन इसे इंसानी रचनात्मकता का विकल्प नहीं समझा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कहानियां, भावनाएं और कल्पनाएं इंसानी अनुभवों से जन्म लेती हैं और इन्हें पूरी तरह मशीनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

घई का मानना है कि समय के साथ तकनीक, पीढ़ियां और सोचने के तरीके बदलते रहते हैं, लेकिन रचनात्मकता हमेशा प्रासंगिक बनी रहती है। उन्होंने कहा कि एआई स्वयं मानव बुद्धिमत्ता की देन है और इसका उद्देश्य इंसान की क्षमताओं को बढ़ाना है, न कि उनकी जगह लेना।

उनके इस विचार को सोशल मीडिया पर काफी सराहना मिल रही है। कई लोगों ने भी माना कि तकनीक और मानवीय रचनात्मकता का संतुलन ही भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बनने वाला है।

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