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वन्यजीव सप्ताह में भेड़िया संरक्षण पर संगोष्ठी, हाड़ौती में संभावित रहवास क्षेत्र विकसित करने पर मंथन

वन्यजीव सप्ताह में भेड़िया संरक्षण पर संगोष्ठी, हाड़ौती में संभावित रहवास क्षेत्र विकसित करने पर मंथन

कोटा। 72वें वन्यजीव सप्ताह के तहत शनिवार को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के जैव-विविधता से परिपूर्ण क्षेत्र गराड़िया महादेव में वन भ्रमण से दिन की शुरुआत हुई। वन भ्रमण में मूक-बधिर बाल विकास केंद्र के विशेष बच्चों, विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं सहित करीब 200 वन्यजीव प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
भेड़िया संरक्षण पर संगोष्ठी आयोजित
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की ओर से भेड़िया संरक्षण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का नेतृत्व मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एवं मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव कोटा टी. मोहनराज तथा उप वन संरक्षक मुकुंदरा नेशनल पार्क मुथ्थु एस. ने किया।
भारतीय ग्रे वुल्फ के व्यवहार और संरक्षण चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेंद्र खंडाल ने भारतीय ग्रे वुल्फ के व्यवहार, प्राकृतिक आवास, मानव गतिविधियों से भेड़ियों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव तथा उनके संरक्षण से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राजस्थान में देश की कुल भेड़िया आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है।
हाड़ौती में संभावित भेड़िया रहवास क्षेत्र विकसित करने की रूपरेखा पर मंथन
डॉ. खंडाल ने भेड़ियों के संरक्षण एवं अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देते हुए हाड़ौती के वन क्षेत्रों में भेड़ियों के लिए संभावित रहवास क्षेत्र विकसित करने की रूपरेखा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भेड़ियों के प्राकृतिक आवासों की पहचान, उनके व्यवहार के अध्ययन तथा संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
वन्यजीव विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने लिया भाग
संगोष्ठी में उप वन संरक्षक वन्यजीव कोटा प्रमोद धाकड़, डॉ. सुधीर गुप्ता, सहायक वन संरक्षक, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रोफेसर, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा वन्यजीव प्रेमियों सहित करीब 200 प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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