राउत का PM मोदी से बड़ा सवाल, चीन से जमीन वापस लेने की मांग
नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने के बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ा मुद्दा उठाने की मांग की है। राउत ने कहा कि पीएम मोदी को शी जिनपिंग के सामने लद्दाख और गलवान में भारतीय क्षेत्र से जुड़ा सवाल स्पष्ट रूप से रखना चाहिए।
राउत ने कहा कि चीन को उन इलाकों से पीछे हटना चाहिए, जहां भारत की ओर से घुसपैठ के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से भारतीय जमीन वापस लेने के मुद्दे पर चीन के सामने स्पष्ट रुख रखने की अपील की।
25 दौर की बातचीत पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने भारत और चीन के बीच पिछले दो वर्षों में हुई बातचीत को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के 25 दौर हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद रिश्तों में वास्तविक प्रगति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
राउत ने सवाल किया कि इतने दौर की वार्ता के बाद भारत-चीन संबंधों में आखिर कितना बदलाव आया है। उन्होंने केंद्र सरकार से चीन के साथ बातचीत के दौरान सीमा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग की।
ईरान को लेकर भी बोले राउत
संजय राउत ने इसी दौरान ईरान के राष्ट्रपति के भारत दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने ईरान की नीतियों और उसके रुख की तारीफ करते हुए कहा कि ईरान ने इजरायल और अमेरिका के सामने अपनी ताकत और आत्मसम्मान का प्रदर्शन किया है।
उन्होंने चीन और अमेरिका को मुख्य रूप से व्यापारिक हितों वाला देश बताते हुए दोनों की नीतियों पर टिप्पणी की। राउत के बयान ऐसे समय आए हैं, जब नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहुंचे हैं।
दिल्ली पहुंचे शी जिनपिंग
शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचे। उनके भारत पहुंचने पर पारंपरिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात भी प्रस्तावित है।
शी के साथ चीन का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई ची और चीनी विदेश मंत्री वांग यी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, तकनीक, विकास और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण बनाने का मंच है। समूह में ग्लोबल साउथ के हितों और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषय भी प्रमुखता से उठाए जाते हैं।