पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा- बच्चों को समझना जरूरी
नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की और शिक्षकों से बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों और प्रतिभा पर भी ध्यान देने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की झलकियां साझा करते हुए शिक्षक दिवस को शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर बताया। उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी याद किया, जिनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है।
बातचीत के दौरान एक शिक्षिका ने बताया कि वह बच्चों को नए तरीके से इंटरव्यू करना सिखाती हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बच्चे घर जाकर अपने माता-पिता का भी इंटरव्यू लेते हैं। शिक्षिका के हां कहने पर पीएम मोदी ने पूछा कि बच्चे उनसे खाना बनाने से लेकर बजट और फैसलों तक से जुड़े सवाल पूछते होंगे? इस पर शिक्षिका ने हंसते हुए कहा कि उनके स्कूल के बच्चे तो रिपोर्टर ही बनना चाहते हैं।
एक अन्य शिक्षिका ने बताया कि वह केमिस्ट्री के साथ पर्यावरण शिक्षा भी पढ़ाती हैं। इसके अलावा वह विद्यार्थियों को पब्लिक स्पीकिंग के लिए तैयार करती हैं और उन्हें राज्य, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में मदद कर चुकी हैं।
प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि अगर वह खुद उनकी छात्रा होते और एक अच्छा वक्ता बनना चाहते, तो उन्हें क्या करना चाहिए। शिक्षिका ने आत्मविश्वास को जरूरी बताया। इस दौरान प्रधानमंत्री और शिक्षिका के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत हुई। शिक्षिका ने पीएम के व्यक्तित्व को लेकर मजाकिया टिप्पणी की, जिस पर दोनों हंस पड़े।
प्रधानमंत्री ने इसके बाद शिक्षकों से बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानने के तरीके पर बात की। उन्होंने कहा कि हो सकता है कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा न हो, लेकिन हर व्यक्ति में ईश्वर ने कोई न कोई खास क्षमता जरूर दी है। उन्होंने शिक्षकों से पूछा कि वे उस क्षमता को पहचानने के लिए किस तरह काम करते हैं।
एक शिक्षिका ने जवाब दिया कि कक्षा में मौजूद हर बच्चा अलग होता है। उसकी अपनी प्रतिभा, चुनौती और क्षमता होती है। शिक्षक की जिम्मेदारी इन्हें पहचानना और बच्चे को उसी दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देना है।
एक पुरुष शिक्षक ने एकलव्य स्कूलों के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों ने उन परिवारों को शिक्षा से जोड़ा है, जिनमें बच्चे पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों ने कभी स्कूल नहीं देखा था, उनके बच्चे अब एनआईटी और आईआईटी में जाने का सपना देख रहे हैं और मेडिकल की पढ़ाई के लिए भी आगे बढ़ रहे हैं।
बातचीत में स्वास्थ्य जागरूकता का मुद्दा भी सामने आया। एक शिक्षिका ने बताया कि उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर पर शोध किया है और महिलाओं में इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर बीमारी के संकेतों को पहचानने और समय पर डॉक्टर से सलाह लेने की जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।
इस पर प्रधानमंत्री ने काशी में शुरू किए गए ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अब महिलाएं आगे आकर जांच करा रही हैं और इस तरह की पहल से जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने बड़े स्तर पर जांच से जुड़े एक रिकॉर्ड का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को भी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल धीरे-धीरे एडिक्शन का रूप ले सकता है। बच्चों को खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और दूसरे सकारात्मक कामों से जोड़कर इस समस्या को कम किया जा सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से नशे के खतरे को लेकर भी सतर्क रहने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बार बच्चों के व्यवहार में बदलाव के पीछे ऐसी वजहें हो सकती हैं, जिन पर तुरंत ध्यान नहीं जाता। इसलिए शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार और उनकी गतिविधियों में होने वाले बदलावों को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि शिक्षा का मतलब केवल किताबों और सिलेबस तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षकों को बच्चों की जिंदगी में झांककर उनकी समस्याओं, प्रतिभाओं और जरूरतों को समझना होगा। उनके मुताबिक, बच्चों के भीतर मौजूद जिज्ञासा, रचनात्मकता और सहज बचपन को बनाए रखने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।