विपक्ष का संसद में मार्च, गृह मंत्री से जवाब की मांग
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में बुधवार को विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई सांसद महात्मा गांधी की प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च करते हुए पहुंचे। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े आरोप और जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद का काम चर्चा और संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान निकालना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। खड़गे ने कहा कि यदि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचती है तो यह संसद की लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं है।
खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय उसे राम विरोधी और राष्ट्र विरोधी बताने की कोशिश की जा रही है। खड़गे ने कहा कि किसी मुद्दे पर जांच या पारदर्शिता की मांग करना राष्ट्र विरोधी होना नहीं है।
राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चढ़ावे को लेकर खड़गे ने कहा कि विपक्ष भगवान राम की आस्था का विरोध नहीं कर रहा है। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं से मिले चंदे, सोने-चांदी और अन्य चढ़ावे के इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी कथित भूमि अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन आरोपों की जांच की मांग करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की जनता के प्रति जवाबदेही होती है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि यदि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी, पैलेट गन, आंसू गैस या लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निर्णय लेने वालों को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि मार्च की शुरुआत महात्मा गांधी की प्रतिमा से इसलिए की गई ताकि सरकार गांधी के विचारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को याद करे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि लाठीचार्ज क्यों किया गया और पैलेट गन के इस्तेमाल की जरूरत क्यों पड़ी। तिवारी ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रों से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद में आकर पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत बयान दें और स्पष्ट करें कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग क्यों किया गया। प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर गोलीबारी और पैलेट गन के इस्तेमाल से बच्चे घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा के जरिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
इमरान प्रतापगढ़ी ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन लगातार जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करता रहा है। उनके मुताबिक, यह वहां के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है और केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी क्यों हो रही है।
विपक्षी सांसदों ने कहा कि संसद में गंभीर मुद्दों पर खुली चर्चा होनी चाहिए और सरकार को सवालों के जवाब देने चाहिए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सरकार पर राजनीतिक विरोध को राष्ट्रवाद से जोड़ने और विपक्ष की आवाज दबाने का भी आरोप लगाया।