म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एयूएम 89.51 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
नई दिल्ली। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने अपनी विकास गति बनाए रखी है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में इंडस्ट्री का औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 89.51 लाख करोड़ रुपये हो गया। आईसीआरए एनालिटिक्स की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछली तिमाही के मुकाबले 4.9 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि से 14.1 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि, बाजार में गिरावट का असर मासिक आंकड़ों पर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एयूएम 87.08 लाख करोड़ रुपये था, जो सितंबर में घटकर 82.64 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद सितंबर का आंकड़ा सालाना आधार पर 9.3 प्रतिशत अधिक रहा। यह संकेत देता है कि बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है।
इक्विटी स्कीमों में निवेशकों का भरोसा कायम
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश मिला। हालांकि, यह राशि पहली तिमाही में दर्ज 2.05 लाख करोड़ रुपये के शुद्ध निवेश से कम रही। इसकी प्रमुख वजह डेट आधारित योजनाओं से निकासी और सितंबर में हुई बड़ी फंड निकासी बताई गई है।
इस दौरान इक्विटी आधारित योजनाएं निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहीं। इन स्कीमों में तिमाही के दौरान 92,293 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसके उलट, डेट आधारित योजनाओं से 5,853 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। हाइब्रिड योजनाओं में भी निवेश की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही।
ये आंकड़े बताते हैं कि तिमाही के दौरान निवेशकों की दिलचस्पी इक्विटी से जुड़ी योजनाओं में मजबूत बनी रही, जबकि डेट फंडों में निवेश का रुझान अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
एसआईपी निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों की बढ़ती भागीदारी का असर फोलियो और एसआईपी के आंकड़ों में भी नजर आया। सितंबर 2026 में कुल म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या बढ़कर 28.62 करोड़ पहुंच गई। वहीं, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए मासिक निवेश 32,490 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
सितंबर में 63.26 लाख नए एसआईपी खाते भी जुड़े। नियमित निवेश के इस बढ़ते चलन को म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एसआईपी के जरिए निवेशक एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय नियमित अंतराल पर निवेश कर सकते हैं, जिससे लंबी अवधि में निवेश की आदत विकसित करने में मदद मिलती है। हालांकि, बाजार से जुड़े जोखिम बने रहते हैं और रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
शीर्ष एएमसी की बाजार हिस्सेदारी स्थिर
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के बीच शीर्ष दस एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और इक्विटी योजनाओं में मजबूत निवेश से इंडस्ट्री की दीर्घकालिक संभावनाओं को समर्थन मिल रहा है। बाजार में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद एसआईपी के जरिए लगातार निवेश और निवेशक आधार का विस्तार म्यूचुअल फंड क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत हैं।