मोदी की नीदरलैंड यात्रा से रिश्तों को नई ताकत
- मोदी नीदरलैंड यात्रा में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी।
- भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिली।
- सेमीकंडक्टर और रक्षा सहयोग पर विशेष जोर दिया गया।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16-17 मई 2026 को नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देते हुए भारत-नीदरलैंड रिश्तों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई व्यापक वार्ता में रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी।
रणनीतिक साझेदारी रोडमैप अपनाया गया
दोनों देशों ने 2026-2030 के लिए रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को अपनाया। इसके तहत राजनीतिक संवाद, व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी और पीएम जेटन ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के सफल समापन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर जोर
वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने रक्षा मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही सह-विकास, तकनीक हस्तांतरण और सह-उत्पादन के जरिए रक्षा उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। नीदरलैंड ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रति समर्थन दोहराया।
सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों में बड़ा सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी और पीएम जेटन ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का अहम स्तंभ बताया। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों पर समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। धोलेरा में भारत के पहले फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच हुए समझौते को दोनों नेताओं ने ऐतिहासिक कदम बताया। इसके अलावा डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर और भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और जल प्रबंधन में सहयोग
दोनों देशों ने हरित हाइड्रोजन विकास के लिए भारत-नीदरलैंड रोडमैप लॉन्च किया। नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा परिवर्तन और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। जल प्रबंधन के क्षेत्र में भारत और नीदरलैंड ने नमामि गंगा मिशन, शहरी नदी प्रबंधन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और गुजरात की कल्पसर परियोजना में तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति
प्रधानमंत्री मोदी और पीएम जेटन ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को और बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि नीदरलैंड भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, जबकि भारत डच कंपनियों के लिए तेजी से उभरता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देशों ने सीमा शुल्क सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिससे व्यापार प्रक्रियाएं आसान होंगी और वैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में सहयोग का विस्तार
कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने डेयरी, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और संरक्षित खेती में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बेंगलुरु में पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र में भारत-डच डेयरी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा भी की गई। स्वास्थ्य क्षेत्र में संक्रामक रोगों, डिजिटल हेल्थ, महिला स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। शिक्षा क्षेत्र में उच्च शिक्षा सहयोग समझौते और भारतीय तथा डच विश्वविद्यालयों के बीच नए शैक्षणिक सहयोग का भी स्वागत किया गया।
सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों को मजबूती
दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बताया। प्रवासन और आवागमन पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे उच्च कुशल पेशेवरों और छात्रों की आवाजाही आसान होगी। सांस्कृतिक सहयोग के तहत चोल कालीन ताम्रपत्रों की भारत वापसी का स्वागत किया गया। दोनों देशों ने संग्रहालय, कला, विरासत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिया भारत आने का निमंत्रण
वार्ता के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम रॉब जेटन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। दोनों नेताओं ने विश्वास जताया कि भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर दोनों देशों के सहयोग को नई ऊंचाई देगी।