कच्चे तेल की तेजी के बीच गिरावट में खुला बाजार, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली
मुंबई। कच्चे तेल में लगातार जारी तेजी के बीच भारतीय शेयर की शुरुआत मंगलवार को कमजोरी के साथ हुई। सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 203 अंक या 0.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,099 और निफ्टी 50 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,042 पर था।
शुरुआती कारोबार में बिकवाली का नेतृत्व बैंकिंग शेयर कर रहे थे। निफ्टी बैंक में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट थी। इसके अलावा, फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी फार्मा, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी हेल्थकेयर लाल निशान में थे। दूसरी तरफ, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी ऑटो हरे निशान में थे।
हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 157 अंक या 0.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,405 और निफ्टी स्मॉलकैप 103 अंक या 18,004 पर था।
सेंसेक्स पैक में कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, एमएंडएम, एलएंडटी, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, मारुति सुजुकी, टाइटन, आईटीसी, एनटीपीसी, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड और सन फार्मा गेनर्स थे। एसबीआई, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, ट्रेंड, टाइटन, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, एचयूएल, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग लाल निशान में थे। हालांकि, बैंकॉक और सोल में हरे निशान में थे। अमेरिका शेयर बाजार सोमवार को मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ,जबकि टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
बाजार में कमजोरी की वजह कच्चे तेल में लगातार तेजी को माना जा रहा है, जो कि मंगलवार को 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
कॉमेक्स पर ब्रेंट क्रूड का दाम 0.97 प्रतिशत बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 1.05 प्रतिशत बढ़कर 97.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल में तेजी ऐसे समय पर देखी जा रही है, जब अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। अमेरिका को दिए प्रस्ताव में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार हो गया था और अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी हटने के बाद परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने को तैयार था, लेकिन अमेरिका का मानना है कि दोनों मुद्दों का हल एक साथ निकाला जाना चाहिए, अन्यथा उसका पक्ष कमजोर हो जाएगा।