मन की बात ने घर घर दस्तक दी
हर हर मोदी घर घर मोदी के लोकप्रिय नारे ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जैसे घर घर में
दस्तक दी थी वैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो प्रोग्राम 'मन की बात' ने आज देश के घर
घर में दस्तक दे दी है। कोई माने या न माने मगर यह बिलकुल सच है की अपनी पहचान
खोती आकाशवाणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम ने पुनर्जीवित कर नया जीवनदान
दिया है। मोदी के लोकप्रिय शो ’मन की बात ने रेडियो की लोकप्रियता बढ़ा दी है। आकाशवाणी
पर हर महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम के माध्यम से निश्चय ही मोदी ने
लोगों के मन की बात टटोली और अपना भावनात्मक जुड़ाव भी स्थापित किया।गां धी जयंती 2014 के
अवसर पर शुरू हुए इस कार्यक्रम ने न केवल देश और दुनिया में चल रही गतिविधियों की छुआ
अपितु राष्ट्रीय कार्क्रमों सहित ज्वलंत सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक मुद्दों को
रेखांकित किया है। मन की बात कार्यक्रम 22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों के अलावा 11
विदेशी भाषाओं में प्रसारित किया जाता है। इनमें फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी,
बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी, दारी और स्वाहिली शामिल हैं। इसका प्रसारण आकाशवाणी के 500
से अधिक केंद्रों द्वारा किया जा रहा है। इसका का 100वां एपिसोड 30 अप्रैल को प्रसारित
होगा।
आकाशवाणी ने 95 साल के सफर में काफी उत्तार चढाव देखे है। आठवें दशक तक या यूँ कहे दूरदर्शन के
आगमन तक आकाशवाणी ही शिक्षा, संचार और मनोरंजन के क्षेत्र की सिरमौर थी। उस दौरान घर घर में ही
नहीं अपितु हर हाथ में रेडियो था और लोग इससे चिपके रहते थे। हर प्रकार की सूचना का संवाहक था
रेडियो। 1980 के बाद संचार के आधुनिक साधनों के प्रादुर्भाव के साथ आकाशवाणी का प्रभाव घटता गया।
लोगों ने रेडियो के स्थान पर टीवी को अपनाना शुरू कर दिया। इसी बीच 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री
बनने के बाद मन की बात नामक एक क्रान्तिकारी कार्यक्रम शुरू हुआ। मोदी के एक कार्यक्रम ने रेडियो की
लोकप्रियता बढ़ा दी । कह सकते है इसे नया जीवन मिला है। यह सच है कि आकाशवाणी की साख कमजोर
हुई है मगर आज भी यह अब भी देश में सबसे ज्यादा एरिया कवर करता है।
एक ताज़ा सर्वे के मुताबिक देश के 100 करोड़ लोगों तक मन की बात कार्यक्रम अपनी पहुँच
बना चुका है। मोदी का यह सबसे लोकप्रिय वैश्विक कार्यक्रम रविवार, 30 अप्रैल को 100
एपिसोड पूरे करने जा रही है। प्रसार भारती ने 'मन की बात' सीरीज का शतक पूरा होने के मौके
पर मोदी के इस प्रयास का धरातल पर प्रभाव का आकलन करने के लिए प्रसार भारती और
आईआईएम रोहतक ने एक संयुक्त सर्वे किया। सर्वे के मुताबिक 23 करोड़ लोग हमेशा 'मन की
बात' सुनते हैं। सर्वे के मुताबिक 41 फीसदी लोगों के कभी-कभार से नियमित श्रोता बनने की
संभावना है। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया कि 23 करोड़ श्रोता हर महीने 'मन की बात' कार्यक्रम को
सुनते और देखते हैं। यह बात सर्वे के दौरान उत्तर-पश्चिम औप दक्षिण पूर्वी इलाकों से जुटाए गए
डेटा से सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि 17.6 फीसदी लोग रेडियो पर 'मन की बात'
सुनते हैं जबकि 44.7 फीसदी लोग टीवी पर 'मन की बात' का प्रसारण देखते हैं। इसी तरह से
लगभग 37.6 फीसदी लोग मोबाइल पर 'मन की बात' सुनते हैं। सर्वे से पता चला कि 65
फीसदी लोग हिंदी में तो 18 फीसदी लोग अंग्रेजी में यह कार्यक्रम सुनते हैं। सर्वे में शामिल 60
फीसदी लोगों ने माना कि इस कार्यक्रम को सुनने के बाद उनमें राष्ट्र-निर्माण के कामों में
योगदान की भावना जागी है।
आजादी के बाद प्रगति और विकास का एक मात्र सजीव माध्यम बना आकाशवाणी। बड़े बड़े नेता और
महत्वपूर्ण व्यक्ति अपनी बात आकाशवाणी के माध्यम से देशवासियों के समक्ष रखते थे। निजी चैनलों से
चौबीसों घंटे समाचार और मनोरंजन की सामग्री प्रसारित होने लगी फलस्वरूप लोगों ने आकाशवाणी से मुंह
मोड़ लिया। मगर जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और उन्होंने इसकी सुध बुध ली तब से इसका महत्त्व
एक बार फिर बढ़ा। विशेषरूप से प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम प्रसारित होना शुरू हुआ तब से एक
बार फिर आकाशवाणी लोगों के सिर चढ़ गयी। हर महीने के आखिरी रविवार को पीएम मोदी की ‘मन की
बात’ हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं में प्रसारित होती है। मोदी अपने हर कार्यक्रम में राष्ट्रीय महत्त्व की
बात उठाते है। इसके दो फायदे प्रत्यक्ष तौर पर हुए। एक तो मोदी अपनी बात शहरी और ग्रामीण जनता तक
आसानी से पहुंचते है दूसरे आकाशवाणी के कार्यक्रम भी आम जनता में लोकप्रिय हुए है। गांवों में तो आज
भी रेडियो सूचना और मनोरंजन का माध्यम है। अब रेडियो फिर से आमजन व घरों तक पहुंचने लगा है।
-बाल मुकुन्द ओझा