खड़गे का बड़ा हमला, वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। इंदिरा भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुई बैठक में सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सीडब्ल्यूसी के अन्य सदस्य मौजूद रहे। खड़गे ने अपने संबोधन में मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर पार्टी का रुख सामने रखा। मौजूदा राजनीतिक बहस में भी कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस के सामने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद को कमजोर करने की कोशिश हुई है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवालों को गंभीरता से देखने की जरूरत है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की सबसे बुनियादी ताकत है। उन्होंने संविधान सभा में डॉ. भीमराव अंबेडकर की ओर से मतदाता सूची में योग्य नागरिकों को शामिल किए जाने के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर मतदाता का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर लोगों के बीच सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि एसआईआर का फैसला किस स्तर पर लिया गया और चुनाव आयुक्तों से जुड़े आंतरिक फैसलों को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई गई।
उन्होंने राहुल गांधी की ओर से महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र में मतदाता आंकड़ों को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। खड़गे के मुताबिक, फर्जी मतदाताओं, एक ही पते पर बड़ी संख्या में नाम और फॉर्म-6 से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग को गंभीरता से जवाब देना चाहिए था।
बैठक में खड़गे ने कांग्रेस की पांच मांगें भी सामने रखीं। इनमें मतदाता सूची में बड़े बदलावों से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक करना, हटाए गए मतदाताओं को जानकारी और अपील का अवसर देना, राजनीतिक दलों को जरूरी डेटा समय पर उपलब्ध कराना, गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र जांच और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में अधिक पारदर्शिता शामिल है।
खड़गे ने युवाओं के मताधिकार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने 1988 में मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष किए जाने का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में युवाओं के मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवा और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना चुनावी व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी है। दिल्ली में भी एसआईआर के दौरान 18 से 25 वर्ष के युवाओं के पंजीकरण के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी एक चुनाव को जीतने या हारने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, सरकारें और चुनाव बदलते रहते हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी संस्थागत आधार हैं। उन्होंने कहा कि आम मतदाता लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसके मताधिकार की सुरक्षा जरूरी है।
खड़गे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने देश की कई संस्थाओं के निर्माण और उन्हें अधिकार देने में भूमिका निभाई, लेकिन अब उन्हें लेकर स्वतंत्रता के सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लोकतंत्र की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि जनता के बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
अपने संबोधन के अंत में खड़गे ने सीडब्ल्यूसी सदस्यों से मतदाता सूची में पारदर्शिता, चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता, संस्थाओं की स्वतंत्रता और योग्य नागरिकों के वोट की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाएगी।