सेशेल्स से भारत की नई रणनीति, हिंद महासागर में बढ़ेगी ताकत
New Dehli : हिंद महासागर में बढ़ती वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। करीब 11 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत क्षेत्र में अपने भरोसेमंद साझेदारों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
Seychelles भले ही क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा देश हो, लेकिन हिंद महासागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर उसकी स्थिति उसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। अफ्रीका, पश्चिम एशिया और एशिया को जोड़ने वाले समुद्री रास्तों के बीच स्थित सेशेल्स भारत की समुद्री सुरक्षा नीति में प्रमुख भागीदार बन चुका है।
भारत लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य अड्डे स्थापित करने के बजाय साझेदार देशों की क्षमता बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की नीति पर काम करता रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच और क्षेत्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सेशेल्स के राष्ट्रपति Patrick Herminie के विशेष निमंत्रण पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का सेशेल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गया। उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। प्रधानमंत्री यहां सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। खास बात यह है कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल भी पूरे हो रहे हैं।
राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की ओर से आयोजित राजकीय रात्रिभोज में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स की मित्रता स्थिर, मजबूत और दीर्घकालिक है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर विकास और प्रगति के नए आयाम स्थापित करेंगे।
इस बीच सेशेल्स सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है। सेशेल्स के विदेश मंत्री Barry Faure ने कहा कि वैश्विक शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए उसे सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक संस्थाओं में समय के अनुरूप सुधार की आवश्यकता है ताकि भारत और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम करेंगे। वह सेशेल्स की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। प्रधानमंत्री ने इसे दोनों देशों की साझा लोकतांत्रिक परंपराओं और मजबूत संस्थागत संबंधों का प्रतीक बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।