भारत की स्वदेशी 'प्रलय' मिसाइल का सफल परीक्षण, राजनाथ सिंह बोले- रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि
नई दिल्ली। भारत अपनी रक्षा तकनीक को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली 'प्रलय' मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। ओडिशा तट के पास गुरुवार सुबह किए गए इस परीक्षण से भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक को एक और मजबूती मिली है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस सफलता की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर किया गया परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के तहत आयोजित हुआ। मिसाइल ने परीक्षण के दौरान तय किए गए सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया। विभिन्न रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने भी इसकी सफलता की पुष्टि की है।
राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ की टीम को बधाई देते हुए कहा कि प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम उपलब्धि है। इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की भारत की कोशिशों को और गति मिलेगी।
समताप मंडल में उड़ान भरने वाले सिस्टम का भी सफल परीक्षण
प्रलय मिसाइल के परीक्षण से पहले डीआरडीओ ने पिछले महीने स्वदेशी हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम का भी सफल परीक्षण किया था। इस परीक्षण में प्लेटफॉर्म ने समुद्र तल से करीब 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी और लंबे समय तक समताप मंडल में काम करने की क्षमता दिखाई।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान इस प्लेटफॉर्म को औसतन 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया। इसके बाद करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर इसे 30 मिनट से अधिक समय तक संचालित किया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे वापस जमीन पर उतारा गया और सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया गया।
निगरानी और संचार के क्षेत्र में भी मिलेगी मदद
हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम को भविष्य में निगरानी, संचार और विभिन्न मॉनिटरिंग अभियानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समताप मंडल में लंबे समय तक सक्रिय रहने की इसकी क्षमता सामरिक जरूरतों के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकती है।
परीक्षण के दौरान एयरबोर्न प्लेटफॉर्म से ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक वास्तविक समय में वीडियो और उड़ान से जुड़े आंकड़े लगातार भेजे गए। इससे सिस्टम की तकनीकी क्षमता और नियंत्रण व्यवस्था का आकलन किया गया।
कई तकनीकी उपकरणों ने किया बेहतर प्रदर्शन
इस प्लेटफॉर्म में इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रित करने वाले उपकरणों सहित कई आधुनिक तकनीकी सिस्टम लगाए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षण के दौरान सभी सब-सिस्टम ने निर्धारित मानकों के अनुरूप काम किया।
इस अभियान को भारतीय वायुसेना, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दिनेस एंड सर्टिफिकेशन, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और अन्य नागरिक एजेंसियों के सहयोग से पूरा किया गया।
प्रलय मिसाइल और हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम के सफल परीक्षण भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमता में हो रही प्रगति को दर्शाते हैं। इन उपलब्धियों से स्वदेशी तकनीक के विकास और देश की सामरिक तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।