MSME सेक्टर को नई ताकत, भारत-दक्षिण अफ्रीका ने बढ़ाया सहयोग
नई दिल्ली। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की पहल करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने इस क्षेत्र को आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और समावेशी विकास का प्रमुख आधार मानते हुए आपसी तालमेल बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
एमएसएमई मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने की, जबकि दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां की लघु व्यवसाय विकास मंत्री स्टेला टेम्बिसा नडाबेनी ने किया। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने उद्यमों को अधिक सशक्त बनाने और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।
विचार-विमर्श के दौरान वित्तीय संसाधनों तक आसान पहुंच, छोटे उद्यमों के औपचारिककरण को प्रोत्साहन, डिजिटल तकनीकों को अपनाने की गति बढ़ाने और उद्यमिता व कौशल विकास को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों देशों ने माना कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की सफलता के लिए तकनीकी रूप से सक्षम और नवाचार आधारित ढांचा आवश्यक है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि एमएसएमई को क्षेत्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने के लिए व्यापक रणनीति अपनानी होगी। इसके तहत डिजिटल समावेशन बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और तकनीकी अंतर को कम करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
इस दौरान ब्रिक्स देशों के सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। 'नई औद्योगिक क्रांति पर ब्रिक्स साझेदारी' के अंतर्गत आयोजित दूसरी एसएमई कार्य समूह बैठक में सदस्य देशों ने अपने अनुभव साझा किए और छोटे उद्यमों के विकास के लिए अपनाई जा रही सफल नीतियों पर विचार रखा।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि प्रौद्योगिकी तक बेहतर पहुंच, मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए एमएसएमई क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। दोनों देशों ने भविष्य में सहयोग को और गहरा करने तथा छोटे उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में साथ मिलकर काम करने का संकल्प व्यक्त किया।